नीमच जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों ने एक बार फिर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाते हुए एक महिला को मौत के मुँह से बाहर निकाल लिया है। झाबुआ जिले के सारंगी गांव की रहने वाली गेंदाबाई पति जितेंद्र गामड़, जो राजस्थान के कनेरा में मजदूरी करने आई थीं,अचानक रप्चरड इक्टोपिक प्रेगनेंसी जैसी जानलेवा स्थिति का शिकार हो गईं। पेट में असहनीय दर्द के बाद उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया,जहाँ सर्जन डॉ. लाड धाकड़ और उनकी टीम की सूझबूझ ने उन्हें नया जीवनदान दिया। महिला की स्थिति इतनी नाजुक थी कि भ्रूण गर्भाशय के बजाय नली में ही फट गया था, जिससे उनके पूरे पेट में खून फैल गया और शरीर में रक्त का स्तर गिरकर महज 2 पॉइंट रह गया था। साथ ही महिला का बीपी गिरकर 72/35 पर पहुंच गया था, जो किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकता था। सर्जन डॉ. लाड धाकड़ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बेहद साहसी फैसला लिया,क्योंकि मरीज की हालत ऐसी नहीं थी कि उन्हें हायर सेंटर रेफर किया जा सके; रास्ते में ही जान जाने का बड़ा खतरा था। डॉ. लाड धाकड़ के नेतृत्व में गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. रुखसिन खान, डॉ. दिनेश,डॉ. कुणाल और नर्सिंग टीम ने जोखिम उठाते हुए तुरंत ऑपरेशन शुरू किया। करीब दो घंटे चले इस जटिल ऑपरेशन के दौरान और उसके बाद महिला को कुल 10 बोतलें चढ़ाई गईं,जिनमें 4 बोतल खून और 6 बोतल प्लाज्मा शामिल था। ऑपरेशन के बाद महिला को वेंटिलेटर और आईसीयू में विशेष निगरानी में रखा गया। अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और उसे मैटरनिटी वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है, जहाँ से शनिवार शाम उनकी छुट्टी कर दी जाएगी। गेंदाबाई और उनके परिजनों ने डॉ. लाड धाकड़ एवं पूरी टीम का आभार जताते हुए कहा कि डॉक्टरों की त्वरित निर्णय क्षमता ने ही उन्हें मौत के मुँह से सुरक्षित बाहर निकाला है।


