नीमच। सावन से पहले हरियाली की चादर ओढ़े सुखानंद धाम एक बार फिर लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत को तैयार है। 71 फीट ऊंचा प्राकृतिक झरना, घने जंगल, पहाड़ियां और ‘छोटी गंगाजी’ की धार्मिक मान्यता इसे मालवा-मेवाड़ का प्रमुख आस्था एवं पर्यटन स्थल बनाती है। लेकिन प्रकृति की इस अनुपम धरोहर पर बदहाल स्वच्छता, अवैध अतिक्रमण और प्रशासनिक उदासीनता का साया भी साफ दिखाई दे रहा है।
71 फीट का झरना और हरियाली बना आकर्षण
अरावली पर्वतमाला की वादियों में बसे सुखानंद धाम में मानसून के दौरान 71 फीट ऊंचाई से गिरता प्राकृतिक जलप्रपात, घने वन और सैकड़ों बंदरों की अठखेलियां श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। चंदन, महुआ, खैर, खिरनी और बांस के वृक्षों से घिरा यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है।
‘छोटी गंगाजी’ में अस्थि विसर्जन की अनूठी मान्यता
धाम स्थित पवित्र गंगा तालाब को ‘छोटी गंगाजी’ के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि यहां अस्थि विसर्जन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। मध्यप्रदेश और राजस्थान से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, जबकि सावन और भादौ में लाखों की भीड़ उमड़ती है।
सड़क, घाट और डोम से बढ़ीं सुविधाएं
विधायक ओमप्रकाश सखलेचा के प्रयासों से नया घाट मार्ग, निर्माणाधीन सड़क और विशाल डोम जैसी सुविधाएं विकसित हुई हैं। जावद से सुखानंद धाम तक टू-लेन सड़क बनने से श्रद्धालुओं का आवागमन भी आसान हुआ है।
पर्यटन का बड़ा केंद्र बनने की क्षमता
नसन्नी जलाशय, टिपिया खो, बांदरिया खो, केनपुरिया जलाशय और वन विभाग की नर्सरी जैसे प्राकृतिक स्थल इस क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के साथ इको-टूरिज्म का बड़ा केंद्र बना सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समग्र पर्यटन योजना से यहां रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।
आस्था पर अव्यवस्थाओं का ग्रहण
श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में जगह-जगह कचरा फैला है। बंदरों और आवारा पशुओं के कारण गंदगी व दुर्गंध बनी रहती है। वहीं मंदिर की बहुमूल्य भूमि पर लगातार हो रहे अतिक्रमण भी चिंता का विषय हैं।
नगर परिषद को जिम्मेदारी सौंपने की उठी मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले व्यवस्थाएं बेहतर थीं, लेकिन ग्राम पंचायत को जिम्मेदारी मिलने के बाद हालात बिगड़े हैं। अब नगर परिषद अठाना को मेला और धाम की व्यवस्था सौंपने की मांग फिर तेज हो गई है। प्रस्ताव प्रशासन तक पहुंच चुका है, लेकिन अभी तक निर्णय लंबित है।