डोडा चुरा के अवैध व्यवसाय पर ?,डोडा -चूरी के अवैध व्यवसाय पर नीमच के पत्रकार भाई श्री विश्वदेव शर्मा की कलमसे ! नीमच: अफीम, डोडा चूरा और प्रेस नोट की पर्देदारी "कार्रवाई होती है… लेकिन कहानी छिपा दी जाती है!" अपन तो कहेंगे
03 Aug 2025
Local News
डोडा चुरा के अवैध व्यवसाय पर ?,डोडा -चूरी के अवैध व्यवसाय पर नीमच के पत्रकार भाई श्री विश्वदेव शर्मा की कलमसे !
नीमच: अफीम, डोडा चूरा और प्रेस नोट की पर्देदारी
"कार्रवाई होती है… लेकिन कहानी छिपा दी जाती है!"
अपन तो कहेंगे… विश्व देव शर्मा की कलम से
नीमच, मध्य प्रदेश का वह जिला जहाँ अफीम का वैधानिक उत्पादन होता है, और साथ ही जहां अवैध कारोबार की भी परछाई फैली हुई है। प्रशासन हर बार दावा करता है कि “बड़ी कार्रवाई” हुई है, “डोडा चूरा पकड़ा गया”, “तस्कर गिरफ़्त में आए”। लेकिन सवाल ये है कि क्या हर प्रेस नोट सच्चाई को उजागर करता है? या फिर… आधी कहानी छिपा लेता है?
सूत्र कहते हैं – कहानी प्रेस नोट से बड़ी होती है
प्रशासन के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि:
🔹 "कार्रवाई पहले तय होती है, फिर अपराध खोजा जाता है।" कई मामलों में तस्कर कौन होगा, कितना माल जब्त दिखाना है, और किस धारा में चालान करना है, यह सब पहले से तय होता है। ऐसे मामलों में अक्सर वे लोग निशाना बनते हैं जो या तो 'समझौता' करने में चूक गए, या जिन्हें दिखाना ज़रूरी था।
🔹 "जितना पकड़ा जाता है, उससे ज़्यादा छोड़ा भी जाता है!" सूत्र बताते हैं कि असल जब्ती में जो माल मिलता है, उसमें से आधा ही FIR में दर्ज होता है, बाकी का ‘प्रबंधन’ किया जाता है। कभी नष्ट किया जाता है, कभी ‘री-सप्लाई’!
🔹 "कुछ नाम बार-बार आते हैं, कुछ कभी नहीं आते…" जिन लोगों की व्यवस्था में पकड़ मज़बूत है, उनका नाम शायद ही किसी प्रेस नोट में आता हो। जबकि कुछ नाम ऐसे होते हैं जो हर 6 महीने में एक बार ‘पकड़े’ जाते हैं — ताकि आंकड़े भी बनें और कार्रवाई भी दिखे।
खाकी की खामोश सहमति?
• कुछ रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों की मानें तो "नीमच जैसे ज़िलों में अफीम और डोडा चूरा का काला व्यापार कभी पुलिस की नज़रों से छिपा नहीं होता — वह या तो अनदेखा किया जाता है, या अपने ही तरीक़े से 'सुधारा' जाता है।"
• एक स्थानीय व्यापारी सूत्र का दावा — "कई बार कार्रवाई दिखाने के लिए माल भेजा भी जाता है। मतलब पहले ही तय हो जाता है कि 'फलां ट्रैक्टर पकड़ा जाएगा', बस गाड़ी, ड्राइवर और माल भेज दो।" ये ‘डीलिंग’ मौखिक होती है — कानूनी दस्तावेज़ों से कोसों दूर।
सवाल जो हर प्रेस नोट के नीचे होना चाहिए:
✅ क्या पकड़े गए लोग इस व्यापार के मास्टरमाइंड हैं या बलि के बकरे? ✅ क्या ये कार्रवाई आने वाले किसी ट्रांसफर या निरीक्षण से पहले की गई "औपचारिक" तैयारी है? ✅ क्या हर अफीम और डोडा चूरा की खेप इतनी ही पकड़ में आती है, जितनी बताई जाती है?
जनता क्या समझे?
जनता के लिए "कार्रवाई" का मतलब है सुरक्षा और कानून का अमल। लेकिन जब हर कुछ महीनों में वही नाम, वही जगहें, वही अफसर और वही प्रेस नोट आने लगते हैं — तो समझना मुश्किल नहीं कि:
"या तो अपराध बहुत ज्यादा है… या कार्रवाई बहुत बनावटी!"
निष्कर्ष:
नीमच में अफीम और डोडा चूरा का व्यापार एक खुला रहस्य है। कार्रवाई होती है, पर पूरी कहानी सामने नहीं आती। प्रेस नोट बनते हैं, पर सच्चाई अक्सर फाइलों में गुम हो जाती है।
जब तक खाकी सिर्फ दिखावे की कार्रवाई करती रहेगी, और खामोश सहमति बनी रहेगी, तब तक “नशे से दूरी” का नारा बस एक सरकारी इरादा रहेगा, ज़मीनी हकीकत नहीं।
🖊️ "अपन तो कहेंगे… सच्चाई के पीछे प्रेस नोट की चुप्पी सबसे बड़ा अपराध है!"
विश्वदेव शर्मा जी की पोस्ट पर नीमच के पूर्व विधायक डाक्टर सम्पत स्वरूप जाजू की प्रतिक्रिया 👇
सटीक जानकारी! साधुवाद
अफ़ीम और डोडा चूरे अवैध व्यवसाय पर तथ्यात्मक जानकारी !
अफ़ीम उत्पादक क्षेत्रों में ख़ास कर मध्यप्रदेश और राजस्थान के मंदसौर नीमच चित्तौड़गढ़ प्रताप गढ़ कोटा झालावाड़ के जिलों में विगत कई दशकों से अवैध अफीम की खेती अवैध अफीम, डोडा चूरी और मादक पदार्थों का कारोबार लगातार बढ़ रहा है!
यह कारोबार एक संगठित गठबंधन बना कर किया जाता है जिसकी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष जानकारी स्थानीय सभी जिम्मेदार लोगो को होती है !
दुर्भाग्य है कि अफ़ीम उत्पादक क्षेत्र में जिम्मेदारों को सबकुछ पता होने के बाद भी केवल दिखावे की कार्यवाही की जाती है !
संपूर्ण मंदसौर - नीमच- जावरा संसदीय क्षेत्र में अराजकता का जंगल राज है !
विभिन्न क्षेत्र के माफियाओ को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है जिसके परिणाम स्वरूप जिनको अवैध कार्य रोक कर कानून व्यवस्था बनाये रखने की जिम्मेदारी है में से ही कुछ तथाकथित लोग स्वयं लिप्त होकर खुले रूप से अवैध कार्यो को विगत दो दशकों से अंजाम दे रहे है !
प्रशासन मूक दर्शक बन सबकुछ देख रहा हैं !
संपूर्ण मंदसौर संसदीय क्षेत्र में राजनीतिक संरक्षण में अवैध मादक पदार्थों और अवैध शराब का कारोबार अपने चरम पर है !
ड्रग माफिया अफीम माफिया , तथाकथित राजनीतिक नेताओ और तथाकथित पुलिस के लोगो का गठबंधन सम्पूर्ण अवैध व्यवसाय को सुचारू रूप से विगत दो दशकों से संचालित कर रहे हैं !स्थानीय पंचायतों जनपदों और जिला पंचायतों में अवैध मादक पदार्थों का व्यवसाय करने वाले अपने रसूख से चुन कर आते है जिनको राजनीतिक संरक्षण का लाभ मिलता है !
डोडा चूरा के नष्टीकरण नीति का मध्यप्रदेश सरकार विगत दस वर्षों से क्रियान्वयन नहीं करना अवैध व्यवसाय को बढ़ावा दे रहा है जिसको संसदीय क्षेत्र के राजनीतिक दल के जिम्मेदार जान कर भी आँखे मूँद कर नींद निकाल रहे है !