सरवानिया महाराज। अभी तो सोयाबीन के मैहसूल (मुआवजा) की बात ही आधी अधुरी है और एक बार फिर जाती हुई बहार की बारिश ने शेष बचे खुचे दस पांच प्रतिशत किसानों की खेतों में पड़ी सोयाबीन पर पानी फेर दिया। किसान बोलें अब तो सोयाबीन खेत में ही अंकुरित हो जायेगी। साल दर साल सीजन वार प्रकृति का दंश झेल झेल कर खेती किसानी को मजबूर किसान की आश पर कभी अतिवृष्टि तो कभी अल्पवर्षा तो कभी मावठा तो कभी ओलों के साथ साथ शीतदाह से केवल फसलें ही चौपट नहीं होती बल्कि उस किसान के खून पसीने की पकी पकाई फसल के साथ भविष्य के सपने भी चौपट हो जाते हैं, बावजूद इसके किसानों ने खेती किसानी से मुख नहीं मौड़ा है। मजबूरन या परिवार के पेट की आग उसे बार बार नुकसान उठाने के बाद भी खेती किसानी करने के लिए विवस करती है। अनाप-शनाप नुकसान पर नाम मात्र का सरकारी मैहसूल उंट के मूंह में जिरें के समान है। सरवानिया में आज फिर बादलों ने अचानक जमकर बरसना शुरू कर दिया। दोपहर को करीब पौने एक बजे शहर में एक बार फिर मौसम ने दस्तक दी। इस बार जोरदार बारिश ने मौसम को खुशनुमा कर दिया,लेकिन खेती किसानी करने वाले कृषकों को इसके चलते अनायास ही परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब बीस मिनट तक एक जैसी रप्तार से बरसी बारिश ने किसानों को चिंता में डाल दिया।