ग्रामीण हाट बाजार में तब्दील नीमच के मुख्य मार्ग,नीमच में घर से निकलने वाले अपराधबोध से ग्रसित - 'निकले ही क्यों' !,हर नया ‘सिंघम’ कुछ ही वक्त में चला जाता है तंद्रा में,अव्यवस्थाओं को नजरअंदाज करने वाले पुलिस-प्रशासन को लेना होगा यू-टर्न
10 Oct 2025
Local News
द वॉचमैन पोस्ट
नीमच। (कपिल सिंह चौहान) यूं तो बेहतरीन प्लानिंग और अधोसंरचनाओं के साथ नीमच शहर को बसाने का श्रेय अंग्रेजों को जाता है, लेकिन इसके बावजूद,जिला मुख्यालय होने के बाद भी आज का शहर किसी ग्रामीण कस्बाई स्वरूप में नजर आ रहा है। नीमच की मुख्य सड़कों पर अब ‘हाट बाजार’ जैसा दृश्य है। प्रशासन और पुलिस ने मानो हाथ खड़े कर दिए हों। व्यवस्थाओं के नाम पर केवल दिखावा हो रहा है।
अफरातफरी,रॉन्ग साइड वाहन और असुरक्षित पैदल यात्री
शहर की सड़कों पर अनियंत्रित, निरंकुश और नियमविरुद्ध ट्रैफिक का आलम इस कदर है कि आम शहरी और राहगीर आतंकित हैं। नीमच विकास के दावों में भले आगे बढ़ रहा हो,लेकिन सड़क पर उतरते ही असली तस्वीर सामने आ जाती है। रेस्ट हाउस से शोरूम चौराहा,फव्वारा चौक,बस स्टैंड रोड़ और महू रोड़,हर जगह बेतरतीब करतब दिखाते वाहन,अफरातफरी और नियमों की खुली अनदेखी दिखती है। बाइक,कारें और अन्य वाहन फर्राटे से रॉन्ग साइड दौड़ते हैं। बाइकर मनमर्जी से यू-टर्न लेते हैं। कचरा वाहन और पानी की कैन सप्लाई करने वाले टेम्पो बीच सड़क पर ब्रेक मार कर निर्भीक हो ‘सर्विस’ दे रहे हैं। पैदल यात्री और राहगीर पूरी तरह असुरक्षित हैं।
पुलिस की तैनाती महज औपचारिकता, पार्किंग स्थल अवैध कब्जे में,कुछ चौराहों पर पुलिसकर्मी तैनाती की महज रस्म निभा रहे हैं। नियम विरुद्ध वाहन चालकों को न तो कोई नसीहत दी जाती है और न ही रोक-टोक। यहाँ पार्किंग का तो कोई प्रावधान ही नहीं, जहां है वहां ठेले और रेहड़ी वालों का कब्जा है। फव्वारा चौक,सब्जी मंडी और टैगोर मार्ग पर तो मुख्य सड़क के बीचों बीच व्यापारी ठेलों पर 'कारोबार' कर रहे हैं। स्थायी दुकानदारों ने भी अपनी दुकानों से अधिक सामान सड़क पर फैला रखा है।
ट्रेवल्स बसें मनमानी की मिसाल — हर संचालक का अपना बस स्टैंड,ट्रेवल्स बसें मनमानी की मिसाल बन चुकी हैं। हद तो यह है कि जिले में बिना परमिट बसें धड़ल्ले से दौड़ रही हैं। बसों के लिए कोई नियत स्थान नहीं है। ट्रेवल्स संचालकों ने महू रोड से लेकर रोडवेज बस स्टैंड और फव्वारा चौक तक अपने बुकिंग काउंटरों के सामने ही ‘स्टैंड’ बना लिए हैं। अलसुबह से रात तक वहीं यात्रियों को चढ़ाया और उतारा जाता है। नतीजतन,यह मार्ग पूरे दिन जाम रहता है, दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है और आम नागरिक के लिए यातायात कभी भी सुगम नहीं होता।
अव्यवस्था की हदें पार,प्रशासन की चुप्पी,टीवीएस चौराहा से हेमू कालानी चौराहा तक सड़क चौड़ी होने के बावजूद यातायात विभाग और नगरपालिका की अनदेखी के चलते आवागमन सहज नहीं है। थोड़ी सी कोशिश, हिदायतों और नसीहतों से व्यवस्था बनाई जा सकती है, लेकिन किसी को परवाह नहीं। शनि मंदिर से कमल चौक तक की सड़क तो किसी भी समीक्षा की सीमा से बाहर है। पहले से ही संकरी सड़क पर जूस पीने वालों, चाय-नमकीन के शौकीनों और गेराज पर वाहन सुधरवाने वालों का अस्त-व्यस्त जमघट वहां से गुजरने वालों को ही अपराधबोध से भर देता है — “निकले ही क्यों घर से!”
नगर पालिका और यातायात विभाग तंद्रा में,यातायात विभाग का हर नया अधिकारी ‘सिंघम’ बनकर आता है, लेकिन दो-तीन माह में तंद्रा में चला जाता है। नगर पालिका और यातायात विभाग कभी-कभार दिखावे के लिए अभियान चलाते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, और फिर वही ढाक के तीन पात।
सख्त हिदायतों और निगरानी के साथ सिविक सेंस जागृत करना होगा,नीमच की सड़कों पर केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि सिस्टम की बेबसी और तंत्र की लापरवाही खुलकर दिखाई देती है। अब सिर्फ चालानी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। जरूरत है — सख्ती से व्यवस्था लागू करने की, लोगों में सिविक सेंस पैदा करने की। इसमें जनता की सहभागिता आवश्यक है, पर सबसे पहले पुलिस और प्रशासन को सड़कों पर उतरकर रोक-टोक और नसीहतों का दौर शुरू करना होगा।