नीमच। शहर के कुछ निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर हाल के दिनों में चर्चाओं का दौर तेज हुआ है। कुछ परिजनों द्वारा यह आशंका जताई गई है कि मामूली बीमारी को भी गंभीर बताकर बड़े अस्पतालों में रेफर करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। हालांकि संबंधित अस्पतालों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
रेफरल प्रक्रिया पर उठते प्रश्न
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर मामलों में उच्च स्तरीय अस्पतालों में रेफर करना सामान्य और आवश्यक प्रक्रिया है। लेकिन यदि बिना पर्याप्त कारण या स्पष्ट जानकारी दिए रेफर किया जाए, तो इससे परिजनों में भ्रम और आर्थिक दबाव की स्थिति बन सकती है।
शहर में यह भी चर्चा है कि कुछ मामलों में रेफरल प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होती। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि ऐसा है, तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसकी समीक्षा आवश्यक मानी जा रही है।
बिलिंग और पारदर्शिता की आवश्यकता
कुछ परिजनों ने उपचार के दौरान बढ़ते बिल और लगातार जांचों को लेकर चिंता व्यक्त की है। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार,हर जांच और प्रक्रिया का चिकित्सकीय औचित्य होना चाहिए और मरीज या परिजनों को उसकी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। विशेषज्ञ मानते हैं कि अस्पतालों में पारदर्शी बिलिंग प्रणाली,अनुमानित खर्च की पूर्व जानकारी और लिखित सहमति जैसी प्रक्रियाएं अनिवार्य रूप से लागू होनी चाहिए।
सरकारी योजनाओं का सही उपयोग जरूरी
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) जैसी योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच हैं। यदि कहीं इन योजनाओं के उपयोग को लेकर भ्रम, देरी या प्रक्रिया संबंधी असंगतियां सामने आती हैं, तो संबंधित अधिकारियों को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
जागरूकता और जवाबदेही दोनों आवश्यक
स्वास्थ्य सेवाओं में विश्वास सबसे महत्वपूर्ण आधार है। मरीजों और परिजनों को चाहिए कि वे किसी भी रेफरल या बड़ी प्रक्रिया से पहले कारणों की स्पष्ट जानकारी लें, अनुमानित खर्च पूछें और उपलब्ध विकल्पों के बारे में जानकारी प्राप्त करें। यदि किसी को उपचार प्रक्रिया, बिलिंग या योजना लाभ में अनियमितता का संदेह हो,तो वे स्वास्थ्य विभाग या संबंधित प्राधिकरण से औपचारिक शिकायत कर सकते हैं।
निष्कर्ष:
स्वास्थ्य सेवा एक संवेदनशील क्षेत्र है,जहां पारदर्शिता, नैतिकता और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिए। यदि कहीं भी शंका की स्थिति बनती है, तो तथ्यों के आधार पर जांच और संवाद ही समाधान का मार्ग है।
निजी अस्पतालों में रेफरल और बिलिंग पर सवाल: क्या मरीजों के हित सुरक्षित हैं?
Related Posts
मनासा में कॉलोनी के शुभारंभ पर किया गुमराह
जीरन कॉलेज में जांच के दौरान हंगामा, प्राचार्य पर मारपीट का आरोप, थाने पहुँचा मामला: छात्र, जनप्रतिनिधि और स्टाफ ने घेरा जीरन थाना; FIR की मांग
जीरन। जीवाजी राव कॉलेज में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब उज्जैन संभाग से आई जांच टीम के सामने ही दो प्रोफेसर आपस में भिड़ गए। जांच के दौरान हुए…


