खंडवा। 3 एकड़ से शुरू हुआ यह सफर आज 300 एकड़ के एम्पायर तक पहुंच चुका है. निमाड़ के मशहूर कॉलोनाइजर अभय जैन की ये कहानी बताती है कि हालात चाहे जैसे हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता की राह खुद बन जाती है. ये कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा से कम नहीं. खंडवा की ऐसी शख्सियत जिसने कभी पान का टब लगाया, दूध बेचा, घड़ी सुधारी और अब बड़े कॉलोनाइजर के रूप में लोग उनको जानते हैं. जी हां, मेहनत और जुनून की ये कहानी हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है. उद्योगपति और कॉलोनाइजर अभय जैन ने संघर्ष भरे बचपन से निकलकर आज करोड़ों का कारोबार खड़ा कर दिया है. अभय जैन का पैतृक निवास हरसूद में रहा है. उनके पिता कांतिलाल जैन के पास महज 3 एकड़ जमीन थी. इसी छोटे से किसान परिवार में जन्मे अभय जैन ने बचपन से ही संघर्ष देखा. 8वीं कक्षा में ही उन्होंने एक घड़ी की दुकान पर काम सीखना शुरू कर दिया था. स्कूल जाने से पहले 3-4 घड़ियां सुधार लेते थे. धीरे-धीरे छोटी सी घड़ी रिपेयरिंग की दुकान खोली. वहीं से आत्मनिर्भर बनने की शुरुआत हुई. कुछ पैसे जमा हुए तो 4 भैंसें खरीदीं और बंदी में दूध बेचना शुरू किया. कॉलेज के समय उन्होंने खेती और प्लांटेशन की दिशा में कदम बढ़ाया. पारंपरिक फसल की जगह यूकेलिप्टस, सुबबुल और पेपरवुड लगाए. पहली बार 35 एकड़ के प्लांटेशन से उन्हें इतनी सफलता मिली कि 200 एकड़ जमीन खरीद ली. फिर 200 एकड़ में भी बड़े स्तर पर प्लांटेशन किया.
इस प्रोजेक्टर ने बदल दी किस्मत
अभय जैन बताते हैं कि असली मोड़ तब आया, जब उन्होंने बरुड गांव में 300 एकड़ में मलयागिरी का श्वेत चंदन लगाया. इस प्रोजेक्ट में कई बड़ी कंपनियों ने रुचि दिखाई और बाद में दिल्ली की एक कंपनी को यह प्रोजेक्ट बेच दिया. यहीं से करोड़ों का मुनाफा हुआ और किस्मत बदल गई. इसके बाद उन्होंने रियल एस्टेट की दुनिया में कदम रखा.
बेटे के साथ मिलकर कॉलोनी बसाई
बेटे आयुष के अमेरिका से पढ़ाई करके लौटने के बाद कॉलोनी डेवलपमेंट का काम शुरू किया. सबसे पहले “स्मार्ट सिटी” कॉलोनी की नींव रखी, जो सफल रही. फिर “कमल बिहार” सहित कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए. आज निमाड़ और मालवा क्षेत्र में उनके कई आवासीय प्रोजेक्ट चल रहे हैं और उन्हें क्षेत्र के बड़े कॉलोनाइजरों में गिना जाता है.
कई राजनीतिक पदों पर भी रहे
अभय जैन सामाजिक रूप से भी सक्रिय हैं. वे भारतीय किसान संघ में जिला अध्यक्ष रह चुके हैं. भाजपा में भी जिम्मेदार पदों पर रहे और वर्तमान में जैन समाज के अध्यक्ष हैं. कहते हैं, “अगर आप धर्म, नीति और ईमानदारी से काम करते हैं तो सफलता जरूर मिलती है. मेहनत और धैर्य सबसे बड़ा निवेश है.” 3 एकड़ से शुरू हुआ यह सफर आज 300 एकड़ के एम्पायर तक पहुंच चुका है.


