(मनोज मीणा)

मनासा। आज़ादी के सात दशक बाद भी मनासा विधानसभा क्षेत्र का कंजार्डा पठार मूलभूत सड़क सुविधा से वंचित है। कंजार्डा पठार, कुकडेश्वर, टामोटी और रामपुरा क्षेत्र के हजारों लोगों की रिश्तेदारी पड़ोसी राज्य राजस्थान के जावदा-निमड़ी क्षेत्र में है, जो बेगूं विधानसभा की रावतभाटा तहसील में आता है। इसके बावजूद दोनों राज्यों को जोड़ने वाली प्रस्तावित सड़कें वर्षों से अधूरी पड़ी हैं।

एक सड़क का आधा निर्माण,बाकी वन विभाग में अटका हुआ है बरखेड़ा बल्ला का खेड़ा से mp सीमा तक सड़क स्वीकृत हुई थी दूरी 5.45 किलोमीटर सड़क स्वीकृत हुई थी। लगभग 3 किलोमीटर सड़क बन चुकी है,लेकिन शेष कार्य वन विभाग की अनुमति के अभाव में रुका हुआ है। यह मार्ग सीधे कंजार्डा पठार के बरखेड़ा को जावदा-निमड़ी क्षेत्र हाड़ा की मोरवन से जोड़ता है और कुल पठार से जावदा निमड़ी क्षेत्र की दूरी मात्र 12 किलोमीटर है, जिसमें मध्यप्रदेश का हिस्सा केवल 6 किलोमीटर है।
दूसरी सड़क भी फाइलों में
बख्तूनी से देवपुरा मार्ग की मांग भी लंबे समय से लंबित है। यह सड़क टामोटी,कुकडेश्वर और रामपुरा क्षेत्र को देवपुरा पंचायत से जोड़ेगी। इस मार्ग का मध्यप्रदेश हिस्सा सिर्फ 5 किलोमीटर है,फिर भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
50 किलोमीटर का अतिरिक्त बोझ
इन सड़कों के अभाव में क्षेत्रवासियों को जावदा-निमड़ी, रावतभाटा और कोटा जाने के लिए डीकेन-रतनगढ़ होकर लगभग 50 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। इससे समय, ईंधन और आर्थिक खर्च बढ़ रहा है।
सांसद ने उठाया मुद्दा, कार्रवाई शून्य
क्षेत्रीय सांसद Sudhir Gupta ने वर्ष 2021 में विभाग को पत्र लिखकर सड़क निर्माण की मांग की थी, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।
ग्रामीणों में आक्रोश
पठार क्षेत्र और टामोटी-कुकडेश्वर के ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में नेता सड़क निर्माण का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही यह मुद्दा ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि दोनों अंतर्राज्यीय सड़कों का निर्माण शीघ्र प्रारंभ कर क्षेत्र को राजस्थान से सीधा जोड़ा जाए, ताकि रावतभाटा, कोटा और गांधीसागर तक आवागमन सुगम हो सके।