नीमच। नीमच विधानसभा क्षेत्र से विधायक दिलीपसिंह परिहार के परिवार से जुड़ी भूमि पर स्थापित पेट्रोल पंप को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि महू–नीमच हाईवे स्थित बायपास क्षेत्र में बना पेट्रोल पंप उस भूमि पर संचालित है,जो मूलतः आदिवासी परिवार को शासन द्वारा पट्टे पर प्रदान की गई थी और “अहस्तांतरणीय” श्रेणी में दर्ज थी। मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है। हालांकि अभी तक प्रशासन या विधायक परिवार की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
राजस्व अभिलेखों के अनुसार ग्राम बरखेड़ा हाड़ा स्थित कृषि भूमि—
सर्वे नं. 181 (रकबा 0.09 हे.) सर्वे नं. 186/1 (रकबा 0.34 हे.) कुल 0.43 हे. भूमि पूर्व में लालूराम भील एवं प्रेमबाई भील के नाम दर्ज थी। बताया जा रहा है कि 21 जनवरी 2021 को उक्त भूमि का नामांतरण विधायक के पुत्र यशराज सिंह एवं पुत्री हर्षना परिहार के नाम दर्ज किया गया।
कानूनी पहलू: क्या कहते हैं प्रावधान?
मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग को प्रदत्त भूमि के संरक्षण हेतु मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 में विशेष प्रावधान किए गए हैं। धारा 165(6) के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति की भूमि का गैर-जनजातीय व्यक्ति को हस्तांतरण प्रतिबंधित है,जब तक सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति न ली जाए। कई मामलों में ऐसी भूमि “अहस्तांतरणीय” (Non-transferable) के रूप में दर्ज होती है, जिसे बिना कलेक्टर की अनुमति या वैधानिक प्रक्रिया के बेचा या स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित नामांतरण निरस्त कर भूमि मूल धारक को लौटाने तथा दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी है। ऐसे में मुख्य प्रश्न यह है कि क्या इस भूमि के हस्तांतरण में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति ली गई थी? यदि हाँ, तो किन शर्तों के साथ?
प्रशासन की भूमिका पर नजर
विशेषज्ञों का कहना है कि आदिवासी भूमि के मामलों में राजस्व विभाग की जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नामांतरण दर्ज करते समय यह देखा जाता है कि भूमि की प्रकृति,श्रेणी और कानूनी स्थिति क्या है। यदि भूमि वास्तव में “अहस्तांतरणीय” थी, तो नामांतरण की प्रक्रिया किन दस्तावेजों और आदेशों के आधार पर की गई—यह जांच का विषय है।
राजनीतिक सरगर्मी तेज
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए। दूसरी ओर, विधायक समर्थकों का तर्क है कि भूमि क्रय-विक्रय की प्रक्रिया विधिसम्मत तरीके से हुई है और सभी आवश्यक अनुमतियाँ प्राप्त की गई थीं।
आगे क्या?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि शिकायत औपचारिक रूप से दर्ज होती है तो कलेक्टर स्तर पर जांच बैठाई जा सकती है। जांच में राजस्व रिकॉर्ड, अनुमति आदेश, लपंजीयन दस्तावेज और भूमि की मूल श्रेणी की पड़ताल की जाएगी।
फिलहाल मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रशासन की आधिकारिक जांच या स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि भूमि हस्तांतरण वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप हुआ या नहीं।

नीमच विधानसभा क्षेत्र के भाजपा समर्थित विधायक दिलीपसिंह परिहार द्वारा महू – नीमच हाईवे पर नीमच बायपास पर पेट्रोल पंप खोला था, इस पेट्रोल पंप की जमीन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जो जमीन आदिवासी को शासन ने पट्टे पर दी थी, जो कि अहस्थानांरित नहीं की जा सकती, लेकिन विधायक ने अपने पॉवर का प्रयोग करके उक्त भूमि की रजिस्ट्री बेटे और बेटी के नाम करवा ली और उस पर पेट्रोल पंप बना लिया।

ऐसे करवाया नामांतरण:-
ग्राम बरखेडा हाडा स्थित कृषि भूमि सर्वे नं. 181 रकबा 0.09 हे., सर्वे नं. 186/1 रकबा 0.34 हे. कुल रकबा 0.43 है. कृषि भूमि पर विक्रेता 01. लालुराम पिता हजारी भील निवासी बरखेडा हाडा 02. प्रेमबाई पति लालुराम भील निवासी बरखेडा हाडा तहसील नीमच के स्थान पर क्रेता 01. यशराज सिंह पिता दिलीप सिंह परिहार निवासी सरदार मोहल्ला नीमचसिटी तहसील नीमच 02. हर्षना परिहार पिता दिलीप सिंह परिहार निवासी सरदार मोहल्ला नीमचसिटी तहसील नीमच का नामान्तरण 21 जनवरी 2021 को करवाया गया। यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पेट्रोल पम्प से जुड़ी हुई भूमि में कई खुलासे हो रहे।