चीताखेड़ा। आवरी माता के दरबार में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं और क्षेत्रीय ग्रामीणों की समस्याओं पर न प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही जनप्रतिनिधि सक्रिय नजर आ रहे हैं। लंबे समय से मांग और विरोध के बाद चीताखेड़ा-रंभावली मार्ग का निर्माण कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन इसकी गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह विकास कार्य नहीं, बल्कि “भ्रष्टाचार का डामरीकरण” बनकर रह गया है।
मामला तब और गंभीर हो जाता है, जब सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेता भी खुद को असहाय बताते दिखाई देते हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष सज्जन सिंह चौहान, किसान मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष नवल गिरी गोस्वामी और पूर्व मंडल अध्यक्ष मधुसूदन राजोरा ने मुद्दा उठाया, लेकिन उनके बयानों में सख्ती के बजाय बेबसी नजर आई।
जनता के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि जब सत्तापक्ष के प्रभावशाली नेता ही अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं करवा पा रहे हैं, तो आमजन अपनी समस्याएं लेकर कहां जाए? क्या प्रशासनिक व्यवस्था इतनी बेलगाम हो चुकी है कि जनप्रतिनिधियों की बातों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है?
विपक्ष की चुप्पी पर भी सवाल
वहीं, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की खामोशी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले जिला पंचायत सदस्य तरुण बाहेती, जो कांग्रेस के जिला अध्यक्ष भी हैं, अब तक इस मामले में खुलकर सामने नहीं आए हैं। सड़क निर्माण में देरी और गुणवत्ता को लेकर उनकी चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
गुणवत्ता पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि विरोध के बाद ठेकेदार द्वारा जल्दबाजी में कार्य किया जा रहा है। रातभर रोलर चलाकर काम पूरा करने की कोशिश की गई, लेकिन निर्माण में गुणवत्ता का अभाव साफ दिखाई दे रहा है। आरोप है कि बिना तकनीकी निगरानी के कार्य हो रहा है और मानकों की अनदेखी की जा रही है।
जनता में बढ़ रहा आक्रोश
आवरी माता के श्रद्धालुओं और क्षेत्रीय लोगों में अब आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही निर्माण कार्य को निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं सुधारा गया, तो आंदोलन किया जाएगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि जनता की आस्था और विकास कार्यों की गुणवत्ता दोनों सुरक्षित रह सकें।


