चित्तौड़गढ़। /डूंगला। राजस्थान सरकार के सहकारिता मंत्री गौतम दक के खिलाफ डूंगला थाने में राजकार्य में बाधा, धमकाने और अभद्र व्यवहार को लेकर मामला दर्ज किया गया है। थाना प्रभारी शैतान सिंह की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज एफआईआर में मंत्री पर पुलिसकर्मियों को सार्वजनिक रूप से गालियां देने, धमकाने और मारपीट का प्रयास करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर के अनुसार पूरा विवाद एक अन्य प्रकरण की जांच के दौरान शुरू हुआ। थाना प्रभारी शैतान सिंह ने बताया कि प्रकरण क्रमांक 18/2026 की जांच के सिलसिले में 25 मई को ईडरा निवासी धनराज खारोल को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया था। पुलिस का आरोप है कि पूछताछ के दौरान धनराज ने अपने बेटे मनोज खारोल और अन्य लोगों को जांच में शामिल करने से इनकार कर दिया और राजनीतिक पहुंच होने की बात कही। रिपोर्ट में उल्लेख है कि इसके बाद पूर्व सरपंच चंद्रशेखर शर्मा ने भी पुलिस पर मंत्री का नाम लेकर दबाव बनाने की कोशिश की और शिकायत की धमकी दी।
एफआईआर के मुताबिक 25 मई की दोपहर मंत्री गौतम दक ने थाना प्रभारी को फोन कर थाने के बाहर बुलाया। आरोप है कि वहां पहुंचने पर मंत्री ने कांस्टेबल लक्ष्मीनारायण और विष्णु कुमार को भी बुलवाया और बिना कोई पक्ष सुने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए गाली-गलौच शुरू कर दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्री ने आम लोगों के सामने पुलिसकर्मियों का अपमान किया, डराने-धमकाने की कोशिश की तथा हाथ उठाकर मारपीट करने का प्रयास भी किया। साथ ही ट्रांसफर कराने और नौकरी खराब करने तक की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया है। थाना प्रभारी शैतान सिंह ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि पुलिस सेवा के दौरान उनके साथ पहले कभी ऐसी घटना नहीं हुई। मंत्री के व्यवहार से वे मानसिक तनाव में चले गए और दो दिन तक अवसाद की स्थिति में रहे। इसी कारण मामला दर्ज कराने में देरी हुई। बाद में वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी देने के बाद एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने मंत्री गौतम दक के खिलाफ बीएनएस की धारा 132, 351(2) और 352 के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
वहीं विवाद बढ़ने के बाद मंत्री गौतम दक ने वायरल ऑडियो पर सफाई देते हुए कहा कि उसमें सुनाई देने वाली आवाज उनकी नहीं लगती। हालांकि उन्होंने पूरे मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी। मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग मंत्री के समर्थन में हैं, जबकि कई लोगों ने इसे सत्ता के अहंकार और पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश बताया है।