निंबाहेड़ा / नीमच। एक तरफ जहां निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर मरीज की जेब ढीली की जा रही है और 'लूट' मची है, वहीं मध्यप्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती इलाके में एक डॉक्टर ऐसा भी है जिसने डॉक्टरी के पेशे को धंधा नहीं, बल्कि सच्ची समाज सेवा बना दिया है। नाम है—डॉ. अशोक कुमार जिंजवाड़िया। सरलता, सहजता और चेहरे पर सदा बनी रहने वाली मुस्कान... यही पहचान है डॉ. जिंजवाड़िया की। राजकीय जिला अस्पताल निंबाहेड़ा में पदस्थ इस डॉक्टर के ओपीडी चैंबर के बाहर रोज सुबह समय से पहले ही मरीजों का मेला लग जाता है।

सुबह 8 बजे से लाइन, हर मरीज को पूरा समय
जैसे ही डॉ. जिंजवाड़िया अस्पताल में अपने चैंबर में दाखिल होते हैं, इंतजार कर रहे मरीज हाथ जोड़कर उनका अभिवादन करते हैं। डॉक्टर साहब भी मुस्कुराकर सबका अभिवादन स्वीकार करते हैं और फिर शुरू होता है राहत बांटने का सिलसिला।

बिना किसी हड़बड़ी के, अनुशासित लाइन में खड़े हर एक मरीज को 10 से 15 मिनट का पूरा समय दिया जाता है। बारीकी से जांच और सटीक इलाज का ही नतीजा है कि यहां आने वाले गंभीर से गंभीर रोग से पीड़ित मरीजों को भी जल्द स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है।

MP से राजस्थान तक की दौड़: सुबह 8 से रात 9 बजे तक नॉन-स्टॉप सेवा:-
डॉ. जिंजवाड़िया का सेवा भाव सिर्फ सरकारी अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। उनकी कार्यशैली किसी को भी हैरान कर सकती है!

 सुबह 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक: नीमच से आकर निंबाहेड़ा के सरकारी जिला अस्पताल में नियमित ओपीडी सेवाएं।

 शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक: ड्यूटी खत्म होने के बाद मंडी चौराहा स्थित डॉ. डांगी के निवास/क्लीनिक पर बिना थके मरीजों की जांच और पूरी तरह मुफ्त इलाज।

शाम के वक्त क्लीनिक पर भी मरीजों का ऐसा हुजूम उमड़ता है कि नंबर लगाने के लिए लंबी कतारें लगानी पड़ती हैं।

मरीजों ने कहा—"डॉक्टर नहीं, हमारे लिए भगवान हैं"
अस्पताल और क्लीनिक के बाहर जब इलाज :-कराकर लौट रहे मरीजों से बात की गई, तो उनकी आंखों में राहत और जुबान पर डॉक्टर साहब के लिए दुआएं थीं। मरीजों का कहना है कि आज के दौर में जहां डॉक्टर बिना फीस के बात भी नहीं करते, वहीं डॉ. जिंजवाड़िया न सिर्फ पूरी लगन से रोग को पकड़ते हैं, बल्कि हंसकर बात करने से ही आधा दर्द खत्म हो जाता है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के इस सीमावर्ती इलाके में डॉ. अशोक कुमार जिंजवाड़िया की यह निःस्वार्थ सेवा आज हर किसी की जुबान पर है और वे सचमुच मानवता की एक नई मिसाल पेश कर रहे हैं।