गरोठ -  पटवारी मनोज मोड़ के निलंबन को लेकर गरोठ तहसील में प्रशासन और पटवारी संघ के बीच तनाव गहराता दिखाई दे रहा है। निलंबन के विरोध में पटवारी संघ ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कलेक्टर मंदसौर एवं तहसीलदार गरोठ के नाम ज्ञापन सौंपा है। संघ ने सीधे तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए निलंबन आदेश तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

संघ का तेवर साफ है—पहले कर्मचारी का पक्ष सुनिए, फिर कार्रवाई कीजिए। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि मनोज मोड़ के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई से पहले उन्हें कारण बताओ सूचना-पत्र जारी कर अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। संघ ने सवाल उठाया है कि जब कर्मचारी को सफाई देने का अवसर ही नहीं मिला तो सीधे इतनी बड़ी कार्रवाई किस आधार पर की गई?

लिखित आदेश नहीं, फिर गैरहाजिरी पर कार्रवाई क्यों?

ज्ञापन में संघ ने कहा है कि श्री गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान एवं यात्रा में शामिल होने के लिए संबंधित पटवारी को कोई पृथक लिखित अथवा ड्यूटी आदेश नहीं दिया गया था। कार्यक्रम की सूचना शासकीय व्हाट्सऐप ग्रुप में दी गई थी। संघ के अनुसार लगातार आने वाले शासकीय संदेशों के बीच यह सूचना संबंधित पटवारी की नजर से छूट गई।

बाद में फोन पर जानकारी मिलने के समय क्षेत्र में लगातार बारिश और चार पहिया वाहन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति थी। संघ का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में तत्काल मोटरसाइकिल से कार्यक्रम स्थल पहुंचना संभव नहीं था। इसके बावजूद मामले को गंभीरता से लेते हुए निलंबन की कार्रवाई कर दी गई।

एक पटवारी के कंधे पर तीन हल्कों का बोझ!

पटवारी संघ ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक और गंभीर सवाल उठाया है। ज्ञापन के अनुसार मनोज मोड़ अपने मूल हल्के के साथ दो अतिरिक्त हल्कों की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। यानी एक पटवारी के जिम्मे तीन हल्कों का काम था।

संघ का कहना है कि अतिरिक्त प्रभार कम करने के लिए कई बार लिखित रूप से और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मांग की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया गया। ऐसे में संघ का सवाल है कि जब कर्मचारी से अतिरिक्त काम लिया जा रहा है तो उसकी जमीनी परेशानियों और काम के दबाव को नजरअंदाज कर कार्रवाई क्यों?

निलंबन की जानकारी प्रचारित करने पर भी नाराजगी

पटवारी संघ ने निलंबन आदेश की जानकारी पत्रकारों एवं सोशल मीडिया में तत्काल प्रसारित किए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। ज्ञापन में कहा गया है कि इससे संबंधित पटवारी की व्यक्तिगत एवं शासकीय छवि तथा आत्मसम्मान प्रभावित हुआ। संघ ने विभागीय कार्रवाई से संबंधित सूचनाओं के अनावश्यक प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने की मांग की है।

अब राजस्व निरीक्षक का अतिरिक्त प्रभार भी नहीं!

मामला यहीं खत्म नहीं होता। पटवारी संघ ने तहसील गरोठ में तीन पटवारियों को दिए गए राजस्व निरीक्षक के अतिरिक्त प्रभार का भी विरोध किया है। संघ का कहना है कि पटवारियों पर दोहरी जिम्मेदारी डालने से उनके मूल हल्कों का काम प्रभावित हो रहा है और पेंडेंसी बढ़ रही है।

इसी के चलते संघ ने 7 सितंबर से राजस्व निरीक्षक का अतिरिक्त प्रभार नहीं संभालने का निर्णय लिया है। ज्ञापन के अनुसार यह व्यवस्था स्थायी राजस्व निरीक्षक की व्यवस्था होने तक जारी रहेगी।

तीन दिन में फैसला नहीं तो क्या होगा?

पटवारी संघ ने प्रशासन को स्पष्ट समयसीमा देते हुए कहा है कि तीन दिवस के भीतर मनोज मोड़ का निलंबन आदेश निरस्त किया जाए। संघ ने कहा है कि वह प्रशासन के साथ सकारात्मक समन्वय के लिए तैयार है, लेकिन कर्मचारियों के साथ न्यायोचित और सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।

अब गेंद प्रशासन के पाले में है। तीन दिन की यह मोहलत गरोठ तहसील में आगे क्या रंग दिखाएगी, यह प्रशासन के अगले कदम पर निर्भर करेगा। फिलहाल पटवारी संघ के तेवरों से साफ है कि मनोज मोड़ के निलंबन का मुद्दा अब महज एक कर्मचारी की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासन और पटवारी संघ के बीच बढ़ते मतभेद का बड़ा मुद्दा बन गया है।