मंदसौर। इन दिनों सोशल मीडिया पर 80 के दशक वाली एआई तस्वीरों का ट्रेंड तेजी से वायरल है। आम लोगों से लेकर राजनेता और सेलिब्रिटीज तक अपनी तस्वीरों को एआई टूल्स के जरिए 1980 के दशक के कपड़ों, मूंछों, हेयरस्टाइल और रेट्रो विंटेज बैकग्राउंड में बदलकर खूब शेयर कर रहे हैं। मंदसौर जिले में भी इस ट्रेंड का असर उस वक्त देखने को मिला जब लोकसभा सांसद सुधीर गुप्ता,राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर और पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया जैसे जनप्रतिनिधियों ने अपनी एआई जनरेटेड रेट्रो तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कीं। लेकिन, नेताओं के इस विंटेज नॉस्टेल्जिया के बीच मंदसौर के कांग्रेसी युवा नेता,लेखक एवं इन्फ्लुएंसर अशांशु संचेती ने इस ट्रेंड को शहर के सुप्रसिद्ध 'तेलिया तालाब' के मुद्दे से जोड़कर जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर एक बेहद तीखा और वैचारिक हमला बोला है।

अशांशु संचेती का तीखा हमला: 'रेट्रो लुक भुनाने वाले तेलिया तालाब की तस्वीर भी पोस्ट करें',संचेती ने तेलिया तालाब के स्टॉप डैम की एक तस्वीर साझा करते हुए सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट के जरिए जनप्रतिनिधियों की चुप्पी और अनदेखी पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।  

80 के दशक का वो शांत और प्राकृतिक तालाब,अशांशु ने लिखा, "सोशल मीडिया पर 80s रेट्रो ट्रेंड छाया हुआ है। हर कोई एक क्लिक में खुद को चालीस साल पीछे ले जाकर विंटेज लुक में मुस्कुरा रहा है। शहर के वो मूंछ ऐंठते चेहरे और स्वयंभू कर्णधार भी अपनी ये पुरानी तस्वीरें बड़े गर्व से साझा कर रहे हैं। हम उस दौर में पैदा नहीं हुए थे, मगर ये कर्णधार तो तब पूरे होश-ओ-हवास में थे। काश! अपने चेहरों का रेट्रो नॉस्टैल्जिया भुनाने वाले इन लोगों में से कोई 80 के दशक के हमारे 'तेलिया तालाब' की भी एक तस्वीर पोस्ट कर देता!"

किसने घोंटा झरने का गला?
उन्होंने आगे लिखा कि 80 के दशक का वह तालाब अपनी कुदरती सीमाओं में शांत और लबालब रहता था। जिसके पानी की अपनी एक सहज आवक थी,एक कलकल बहता झरना था और शहर के लिए एक खुला, नम किनारा था।

विंटेज फिल्टर नहीं छुपा सकता कड़वा सच
युवा नेता ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि 80 के दशक के तेलिया तालाब की तस्वीर कभी नहीं डालेंगे, क्योंकि अगर वह सच सामने आया, तो यह पूछना पड़ेगा कि उस आबो-हवा को किसने निगला? प्राकृतिक जलप्रवाह के रास्तों पर दीवारें किसने खड़ी कीं, झरने का गला किसने घोंटा, और भूमाफियाओं की साठगांठ में तालाब की ज़मीन पर अवैध भराव करके उसे एक बदहाल पोखरे में किसने तब्दील कर दिया?

नेताओं के 'एआई विंटेज लुक' पर गरमाई राजनीति: क्या 80 के तेलिया तालाब का सच दिखाने की हिम्मत है?
अशांशु संचेती के इस तंज के बाद मंदसौर के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाओं का बाज़ार गर्म हो गया है। मंदसौर के लिए 80 का दशक वह दौर था जब 'तेलिया तालाब' अपनी असली सुंदरता, जल-संरक्षण और प्राकृतिक स्वरूप के साथ जीवंत था। जिन नेताओं ने अपनी तस्वीरें शेयर की हैं, उनमें से कई जिम्मेदारी के पदों पर रहते हुए तेलिया तालाब के बर्बादी के साक्षी रहे हैं, यानी उन्हीं की छत्रछाया और अनदेखी में इस ऐतिहासिक धरोहर पर भू-माफियाओं का कब्जा हुआ, अतिक्रमण फैला और तालाब पोखरे में तब्दील हो गया।

ऐसे में अब जनता के बीच से सीधा सवाल उठ रहा है कि "क्या अपनी 80s लुक की मुस्कुराती तस्वीरें साझा करने वाले इन जनप्रतिनिधियों में इतना नैतिक साहस है कि वे उसी 80 के दशक के अपने 'तेलिया तालाब' की मूल तस्वीर भी पोस्ट कर सकें?" 
क्योंकि अगर 80 के दशक के तेलिया तालाब की वास्तविक तस्वीर सामने आई, तो जनता पूछेगी कि शहर की इस अनमोल धरोहर की बलि किसने चढ़ाई? हिसाब माँग लिया जाएगा कि कुदरती आवक को रोकने वाले अवैध निर्माणों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और उस तबाही में मूकदर्शक बने रहने वाले या भू-माफियाओं को परोक्ष संरक्षण देने वाले गुनहगार कौन हैं?

जनप्रतिनिधियों को समझना होगा, विंटेज लुक से नहीं, काम से याद रखेगी आने वाली नस्लें। स्क्रीन पर एआई से 40 साल पुराना फिल्टर लगाकर मासूम बन जाना और वाहवाही लूटना बहुत आसान है, लेकिन हकीकत यह है कि अपनी आंखों के सामने शहर की ऐतिहासिक धरोहरों की बलि चढ़ते देखना और उसमें साझीदार बने रहना एक ऐसा कड़वा सच है जिसे कोई भी विंटेज फिल्टर नहीं छुपा सकता।

नेताओं को यह समझना होगा कि जनता सिर्फ आपकी AI तस्वीरों पर 'लाइक' और 'कमेंट' करने के लिए नहीं है। 80 का दशक याद दिलाना ही है, तो उस दौर के समृद्ध मंदसौर की मौलिकता और उसके जल-स्रोतों की भी सुध लीजिए। वरना आने वाली नस्लें आपको आपके विंटेज लुक से नहीं, बल्कि मंदसौर की सांसें घोंटने वाली आपकी आपराधिक अनदेखी से याद रखेंगी।