पिपलिया स्टेशन:  राजस्थान में जयपुर के मुहाना थाना क्षेत्र में एक नाबालिग किशोर की पुलिस की कथित पिटाई के बाद 11 दिन आईसीयू रहने के बाद मौत हो गई। मृतक 16 वर्षीय ऋतुराज पिता प्रकाश लौहार मल्हारगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम मनासा खुर्द का रहने वाला है। परिजनों ने मुहाना थाना पुलिस पर नाबालिग को पूछताछ के नाम पर अपने कब्जे में लेने तथा उसके साथ बेरहमी से मारपीट करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि कथित मारपीट के बाद किशोर की हालत बिगड़ गई और वह बेहोशी की हालत में अस्पताल पहुंचा। कई दिनों तक आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद रविवार-सोमवार की दरमियानी रात उसने दम तोड़ दिया। किशोर की मौत की खबर सामने आने के बाद मल्हारगढ़ क्षेत्र में भी घटना को लेकर आक्रोश है। परिवार का आरोप है कि उनका नाबालिग बेटा किसी गंभीर अपराध में शामिल नहीं था, फिर भी उसे पुलिस कार्रवाई के नाम पर अपने साथ ले जाया गया और उसके साथ मारपीट की गई। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
*एफआईआर में मां ने दर्ज कराया घटनाक्रम:-*
मामले में मृतक किशोर की मां हेमाबाई पति प्रकाश लोहार निवासी ग्राम मनासा खुर्द, तहसील मल्हारगढ़, जिला मंदसौर, मध्यप्रदेश की ओर से मुहाना थाने में रिपोर्ट दी गई थी। जिसमें बताया 23 सितंबर 2026 को शाम करीब 6.30 बजे सूचना प्राप्त हुई तथा इसके बाद एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने धारा 115 (2), 126 (2), 127 (2) एवं 140 (3) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। ऋतुराज की मौके बाद बाद मामले में धाराएं और बढ़ेगी।
*परिवार के अनुसार 17 सितंबर को दुबई से जयपुर पहुंचा था पिता:-*
मृतक के परिवार के अनुसार उसके नाबालिग ऋतुराज के पिता प्रकाश लोहार दुबई में वेल्डिंग का कार्य करते है। 17 सितंबर को छुट्टी लेकर जयपुर पहुंचे थे। जयपुर पहुंचने के बाद प्रकाश ने परिवार को फोन कर बताया था कि वह जयपुर में होटल रियान्श, इस्कॉन रोड पर ठहरे हुए हैं। परिवार के अनुसार उस समय तक सब कुछ सामान्य था और प्रकाश से फोन पर बातचीत भी हुई थी। अगले दिन जब परिवार ने प्रकाश को फोन किया तो उनका मोबाइल बंद आने लगा। परिवार के लोग परेशान हुए और उनसे संपर्क करने का प्रयास करते रहे। इसी दौरान प्रकाश के बेटे ऋतुराज के पास जयपुर से एक व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने उसे जयपुर आने के लिए कहा और बताया कि उसके पिता होटल रियान्श में रुके हुए हैं।
*पिता से मिलने जयपुर पहुंचा किशोर:-*
परिजनों के अनुसार ऋतुराज ने अपने पिता के बारे में जानकारी मिलने के बाद जयपुर पहुंचा। उसे बताया गया था कि होटल रियान्श के कमरा नंबर 104 में  उसके पिता ठहरे हुए हैं। परिजनों के अनुसार ऋतुराज से बातचीत हुई, लेकिन जयपुर पहुंचने के बाद बेटे ऋतुराज का फोन भी बंद हो गया। परिवार के अनुसार कुछ समय बाद ऋतुराज का फोन आया। उसने बताया कि उसे और उसके पिता को चार-पांच लोगों ने पकड़ रखा है। ऋतुराज ने फोन पर कुछ लोगों के नाम भी बताए। परिवार को चिंता हुई, लेकिन इसके बाद फोन अचानक कट गया और फिर उससे संपर्क नहीं हो पाया।
*मां को मिली बेटे के अस्पताल में भर्ती होने की खबर:-*
परिवार के अनुसार 22 सितंबर को प्रकाश लोहार के दोस्त ललित का फोन आया। उसने बताया कि ऋतुराज जयपुर के नारायणा हृदयालय अस्पताल में भर्ती है। अचानक अस्पताल में भर्ती होने की सूचना मिलने के बाद परिवार के लोग घबरा गए। मां हेमाबाई गांव से जयपुर पहुंचीं। अस्पताल में पहुंचकर उन्होंने देखा कि उनका बेटा गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती था। परिवार के अनुसार वह बेहोश था और डॉक्टर उसकी हालत पर लगातार निगरानी रख रहे थे। परिजनों को यह समझ नहीं आ रहा था कि कुछ दिन पहले तक सामान्य स्थिति में रहने वाला उनका बेटा अचानक इतनी गंभीर हालत में अस्पताल कैसे पहुंच गया।
*परिजनों ने लगाया थर्ड डिग्री का आरोप*:-
मृतक की मां और अन्य परिजनों का आरोप है कि ऋतुराज को पुलिसकर्मी अपने साथ ले गए थे और उसके साथ मारपीट की गई। परिजनों का कहना है कि कथित मारपीट के कारण उसकी हालत गंभीर हुई और वह बेहोशी की स्थिति में पहुंच गया। परिवार का आरोप है कि यदि ऋतुराज की तबीयत पुलिस की मौजूदगी में या पुलिस कार्रवाई के दौरान बिगड़ी थी तो इसकी पूरी जानकारी परिवार को तत्काल दी जानी चाहिए थी। परिवार ने यह भी सवाल उठाया है कि ऋतुराज को अस्पताल पहुंचाने से पहले उसके साथ क्या हुआ था और उसकी मेडिकल जांच में क्या सामने आया।
*सस्ते सोने के शक से जुड़ा बताया जा रहा मामला:-*
पूरे मामले की पृष्ठभूमि सोने के लेन-देन से जुड़ी बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार प्रकाश लोहार को दुबई से जयपुर आने के बाद कुछ लोगों ने संपर्क किया था। परिवार का आरोप है कि रुपयों के लेन-देन को लेकर विवाद हुआ और बाद में ऋतुराज को भी जयपुर बुलाया गया। परिजनों के अनुसार ऋ़तुराज को यह कहकर बुलाया गया था कि उसके पिता जयपुर में हैं। इसके बाद वह जयपुर पहुंचा। परिवार का आरोप है कि पिता के जाने के बाद ऋतुराज को रोक लिया गया और उसके साथ मारपीट की गई। बताया गया जयपुर के एक परिवार ने प्रकाश लौहार को चार लाख रुपए दुबई से सोना लाने के लिए दिए थे। लेकिन रुपए प्रकाश के एकाउंट में नही आने पर वह सोना नही ला पाया। प्रकाश के जयपुर पहंुचने पर सोना मंगवाने वाले परिवार ने रैकी की व इसमें पुलिसकर्मियों को भी शामिल कर प्रकाश को बंधक बना लिया। प्रकाश के पास दो लाख रुपए ही थे। वह देने के बाद प्रकाश ने अपने बेटे ऋतुराज को बुलाया और कहा कि मैं बाकी पेमेंट की व्यवस्था कर ला रहा हंू तो पुलिसकर्मियों ने प्रकाश के बेटे को कस्टडी में रखा और मारपीट की। परिजनों के अनुसार ऋतुराज के साथ हुई मारपीट के बाद उसके कोमा में जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने मामला दबाने के लिए 10 लाख रुपए देने का ऑफर भी दिया।
*पुलिस का दावा- सोने के नाम पर 22 लाख रुपए लेने की शिकायत*:-
वहीं मुहाना थाना पुलिस ने पूरे मामले को अलग तरीके से बताया है। थाना प्रभारी मुकेश खराड़िया ने युवक के साथ थाने में मारपीट किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस के अनुसार प्रकाश लोहार के खिलाफ दुबई से सस्ता सोना लाने के नाम पर करीब 22 लाख रुपए लेने की शिकायत सामने आई थी। इसी शिकायत के संबंध में पुलिस कार्रवाई कर रही थी। पुलिस का कहना है कि नाबालिग को थाने पर परिजन ही लेकर आए थे और थाने पर आने के बाद उसकी तबीयत खराब हुई। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। थाने में नाबालिग के साथ मारपीट नहीं की गई।
*पुलिस के दावे और परिवार के आरोप आमने-सामने :*-
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नाबालिग की हालत आखिर किन परिस्थितियों में बिगड़ी। एक ओर परिवार पुलिस पर बेरहमी से मारपीट करने का आरोप लगा रहा है, वहीं पुलिस थाने में मारपीट किए जाने से इनकार कर रही है। ऐसे में जांच में थाने के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, पुलिस की ड्यूटी पर मौजूदगी, नाबालिग को थाने लाने और अस्पताल ले जाने का समय, अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड तथा घटना से जुड़े अन्य लोगों के बयान महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। यदि किशोर के साथ थाने में मारपीट का आरोप है तो मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों से भी घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
*आईसीयू में जिंदगी और मौत से लड़ता रहा किशोर:*-
परिजनों के अनुसार अस्पताल में भर्ती होने के बाद किशोर की हालत लगातार गंभीर बनी रही। परिवार के लोग अस्पताल में उसके ठीक होने की उम्मीद लगाए बैठे थे। लेकिन उसकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं आया। 11 दिन तक आईसीयू में उपचार के बाद रविवार-सोमवार की दरमियानी रात किशोर ने दम तोड़ दिया। नाबालिग की मौत की खबर परिवार के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी। जिस बेटे को परिजन जयपुर से वापस घर लाने की उम्मीद कर रहे थे, उसकी मौत की खबर मिली।
*मौत के बाद मल्हारगढ़ क्षेत्र में आक्रोश:-*
ऋतुराज की मौत की सूचना मल्हारगढ़ क्षेत्र में पहुंचने के बाद लोगों में घटना को लेकर आक्रोश है। लसुडिया कदमाला गांव में भी परिवार और ग्रामीणों में घटना को लेकर नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि पुलिस कार्रवाई के दौरान किसी नाबालिग की हालत गंभीर हुई और बाद में उसकी मौत हो गई तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। परिजनों ने मांग की है कि मामले की जांच केवल पुलिस स्तर पर नहीं बल्कि निष्पक्ष और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कराई जाए। परिवार यह भी चाहता है कि घटना से जुड़े सभी पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जाए।
*किसान नेता श्यामलाल जोकचंद जयपुर रवाना:-*
इस बीच नाबालिग की मौत की जानकारी मिलने के बाद मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र से किसान नेता श्यामलाल जोकचंद, भगतराम डाबी समर्थकों के साथ सोमवार दोपहर जयपुर के लिए रवाना हुए। उन्होंने परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार को न्याय नहीं मिलने और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में पुलिस के खिलाफ धरना-आंदोलन किया जाएगा।
*परिवार ने उठाए कई गंभीर सवाल:-*
नाबालिग की मौत के बाद परिवार की ओर से कई सवाल उठाए गए हैं। परिवार का कहना है कि आखिर उनके बेटे को जयपुर क्यों बुलाया गया? उसे किन लोगों ने अपने पास रखा? पुलिस उसे किस आधार पर अपने साथ ले गई? थाने में उसकी तबीयत कब बिगड़ी? उसे अस्पताल कब ले जाया गया? परिवार को समय पर सूचना क्यों नहीं मिली? इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद सामने आना चाहिए। परिवार का कहना है कि उनका बेटा नाबालिग था। ऐसे में उसके साथ किसी भी प्रकार की मारपीट या दबाव की कार्रवाई गंभीर विषय है। परिवार ने मांग की है कि नाबालिग के साथ हुई पूरी कार्रवाई की जांच की जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
*जांच में सामने आएगा मौत का वास्तविक कारण:-*
फिलहाल पूरे मामले में परिवार के आरोप और पुलिस का पक्ष अलग-अलग हैं। पुलिस ने मारपीट के आरोपों से इनकार किया है, जबकि परिवार का दावा है कि किशोर के साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी। ऐसे में अब मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, अस्पताल के दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल तथा घटना से जुड़े लोगों के बयान जांच के महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं। नाबालिग की मौत के बाद मामला और गंभीर हो गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि किशोर की तबीयत किन परिस्थितियों में इतनी बिगड़ी कि उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा और आखिर उसकी मौत कैसे हुई। निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
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