पिपलिया स्टेशन (जेपी तेलकार)। जयपुर के मुहाना थाना क्षेत्र में 22 सितंबर को पुलिस कार्रवाई के बाद गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाए गए मंदसौर जिले के मनासा खुर्द निवासी ऋतुराज लोहार की 5 अक्टूबर की सुबह उपचार के दौरान मौत हो गई। ऋतुराज की मौत के बाद परिजनों ने मुहाना थाना पुलिस पर उसे अवैध रूप से हिरासत में रखकर मारपीट करने और प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि पुलिस हिरासत के दौरान उसके साथ मारपीट की गई, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और उसके सिर में गंभीर चोट आई। वहीं पुलिस इन आरोपों से इनकार कर रही है। पुलिस का कहना है कि एक परिवाद के संबंध में पूछताछ के दौरान ऋतुराज की तबीयत बिगड़ी और उल्टी होने पर उसे अस्पताल ले जाया गया था।
ऋतुराज करीब 13 दिन तक अलग-अलग अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझता रहा। पहले उसे मुहाना क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। इसके बाद नारायणा अस्पताल और फिर एसएमएस अस्पताल में उसका उपचार चला। एसएमएस अस्पताल में उपचार के दौरान उसके ब्रेन में डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी सामने आने की जानकारी है। 5 अक्टूबर को उसकी मौत के बाद परिवार ने पोस्टमार्टम कराने और शव ले जाने से पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। सरकार की ओर से मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए जाने के बाद मेडिकल बोर्ड गठित कर पोस्टमार्टम कराया गया।
*22 सितंबर को परिवाद के बाद शुरू हुआ घटनाक्रम*
मामले की शुरुआत 22 सितंबर को भीलवाड़ा निवासी मनोज की ओर से मुहाना थाने में दिए गए परिवाद से हुई। परिवाद में मंदसौर निवासी प्रकाश लोहार पर दुबई से सस्ता सोना उपलब्ध कराने के नाम पर करीब 22 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया गया था। बताया गया कि इसी शिकायत के संबंध में पुलिस ने 22 सितंबर की सुबह करीब 10.30 बजे मंदसौर के ललित और प्रहलाद तथा जयपुर के दिलीप को थाने बुलाया अथवा लेकर आई। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे प्रकाश लोहार के बेटे ऋतुराज को भी थाने लाए जाने की बात सामने आई। परिजनों और मामले से जुड़े लोगों का आरोप है कि ऋतुराज को थाने लाने के बाद उससे पूछताछ की गई और उसके साथ मारपीट की गई। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दो लोगों ने भी पुलिस कार्रवाई के संबंध में अपने बयान दिए हैं।
*प्रत्यक्षदर्शियों ने लगाए मारपीट के आरोप*
मामले में ललित और प्रहलाद के हवाले से सामने आया है कि थाने में ऋतुराज को एक कमरे में ले जाकर पुलिसकर्मियों ने पूछताछ की। आरोप है कि इस दौरान उसके साथ मारपीट की गई, बाल खींचे गए तथा दीवार पर सिर मारा गया। उनका दावा है कि इसके बाद उन्हें भी अलग-अलग पूछताछ के लिए ले जाया गया। पूछताछ के बाद जब ऋतुराज वापस आया तो उसने खुद के साथ मारपीट किए जाने की बात बताई थी। पुलिस और जांच एजेंसियों के पास मौजूद सीसीटीवी फुटेज, थाने की ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की जानकारी और अन्य साक्ष्यों से यह स्पष्ट हो सकता है कि 22 सितंबर को थाने के भीतर वास्तव में क्या हुआ था।
*लॉकअप में बंद करने के बाद बिगड़ी हालत*
परिजनों और मामले से जुड़े लोगों के अनुसार पूछताछ के बाद ऋतुराज को लॉकअप में बंद कर दिया गया था। करीब 3.30 बजे एक संतरी की नजर उस पर पड़ी तो उसकी हालत खराब दिखाई दी। आरोप है कि उसे लॉकअप से बाहर लाया गया, जहां उसने उल्टी की और इसके बाद वह बेसुध हो गया। इसके बाद पुलिस उसे अस्पताल लेकर गई। परिवार का आरोप है कि यदि समय रहते उसकी हालत की सही जानकारी और घटनाक्रम सामने लाया जाता तो मामले की स्थिति अलग हो सकती थी। दूसरी ओर मुहाना थाना पुलिस का कहना है कि ऋतुराज से परिवाद के संबंध में पूछताछ की गई थी। पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान किसी प्रकार का टॉर्चर नहीं किया गया और उल्टी होने पर उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया।
*लकी हॉस्पिटल में दूसरे नाम से भर्ती कराने की बात*
घटना के बाद ऋतुराज को मुहाना क्षेत्र स्थित लकी हॉस्पिटल ले जाया गया। अस्पताल संचालक डॉ. अनिल जैन के अनुसार उसे दोपहर बाद करीब 4.15 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के रिकॉर्ड में उसका नाम 'ऋषिराज' दर्ज होने की बात सामने आई है।
यह भी आरोप है कि अस्पताल रिकॉर्ड में उसके पिता का नाम और पता भी सही दर्ज नहीं किया गया। करीब तीन घंटे उपचार के बाद उसे वहां से डिस्चार्ज किया गया। चिकित्सकों ने आगे बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी। इसके बाद पुलिस उसे नारायणा अस्पताल लेकर गई।
*नारायणा अस्पताल में सीटी स्कैन में सामने आई ब्रेन इंजरी*
नारायणा अस्पताल में ऋतुराज की सीटी स्कैन कराई गई। बाद में एसएमएस अस्पताल में भी सीटी स्कैन किया गया। दोनों रिपोर्टों में ब्रेन में अंदरूनी चोट दिखाई देने की बात सामने आई है।एसएमएस अस्पताल में उपचार करने वाले चिकित्सकों के अनुसार ऋतुराज के ब्रेन में डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी थी। चिकित्सकीय रूप से इस प्रकार की चोट गंभीर सिर की चोट के बाद देखी जाती है। हालांकि यह चोट किन परिस्थितियों में लगी, इसका निश्चित कारण केवल सीटी स्कैन से तय नहीं किया जा सकता। मेडिकल जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि चोट का स्वरूप क्या था और मौत के साथ उसका क्या संबंध रहा।
*मारपीट या अन्य कारण से चोट लगी? जांच में होगा स्पष्ट*
मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि ऋतुराज के ब्रेन में गंभीर चोट कैसे आई। परिवार का आरोप है कि यह चोट पुलिस हिरासत में मारपीट के कारण लगी। वहीं पुलिस का कहना है कि थाने में उसके साथ मारपीट नहीं की गई। चिकित्सकों के अनुसार डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी कई परिस्थितियों में हो सकती है। इसलिए इस चोट को सीधे किसी एक कारण से जोड़ना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा। इसी वजह से पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड, सीटी स्कैन, अस्पताल के डॉक्टरों के बयान और अन्य साक्ष्य इस मामले में महत्वपूर्ण हो गए हैं।
*सांप के काटने की बात भी सामने आई*
मामले में सांप के काटने की बात सामने आने के बाद भी कई सवाल खड़े हुए हैं। परिजनों का आरोप है कि ऋतुराज को नारायणा अस्पताल ले जाने के बाद पुलिस की ओर से सांप के काटने की बात कही गई। परिवार के अनुसार लंबे समय तक उन्हें भी यही बताया गया कि उसे सांप ने काटा है।नारायणा अस्पताल में ऋतुराज को एंटीवेनम के 10 इंजेक्शन लगाए जाने का दावा भी सामने आया है। परिवार का कहना है कि उसके शरीर पर सांप के काटने का कोई स्पष्ट निशान नहीं था। अब जांच में यह भी देखा जाना है कि अस्पताल में स्नेक बाइट की जानकारी किस आधार पर दी गई, किस चिकित्सकीय आधार पर एंटीवेनम उपचार शुरू किया गया और क्या इस संबंध में मेडिकल रिकॉर्ड में कोई स्पष्ट उल्लेख है।
*अस्पताल का करीब 96 हजार रुपए का बिल भी पुलिस ने भरा*
मामले से जुड़े लोगों के अनुसार लकी हॉस्पिटल का करीब 2,500 रुपए तथा नारायणा हॉस्पिटल का करीब 96 हजार रुपए का बिल पुलिस की ओर से भुगतान किया गया। अस्पताल में ऋतुराज के उपचार के दौरान पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को लेकर भी परिजनों ने सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भी पुलिसकर्मी लगातार आसपास मौजूद रहे और परिवार पर मामले को लेकर समझौता करने का दबाव बनाया गया। इन आरोपों की भी जांच की मांग की गई है।
*23 सितंबर को एसएमएस अस्पताल पहुंचाया*
नारायणा अस्पताल में उपचार के बाद 23 सितंबर को ऋतुराज को एसएमएस अस्पताल ले जाया गया। यहां उसकी हालत गंभीर थी और उसे आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। इसके बाद कई दिनों तक चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार चलता रहा।
परिवार के अनुसार ऋतुराज की हालत लगातार गंभीर बनी रही। करीब 13 दिन तक उपचार के बाद 5 अक्टूबर की सुबह करीब 3.30 बजे उसकी मौत हो गई।
*मौत के बाद करीब 24 घंटे तक नहीं हुआ पोस्टमार्टम*
ऋतुराज की मौत के बाद परिवार ने पोस्टमार्टम कराने और शव ले जाने से इनकार कर दिया। परिजनों की मांग थी कि पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, पुलिस हिरासत में मारपीट के आरोपों की जांच की जाए, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए और परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए। मामले को लेकर मंदसौर से किसान नेता श्यामलाल जोकचंद सहित अन्य लोग जयपुर पहुंचे और अधिकारियों से चर्चा की। परिवार की ओर से मांग पत्र भी सौंपा गया। अधिकारियों की ओर से मजिस्ट्रियल जांच, मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद परिजन पोस्टमार्टम के लिए सहमत हुए।
*न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हुए परिजनों के बयान*
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट सौरभ बंसल मौके पर पहुंचे। उनकी मौजूदगी में परिजनों के बयान दर्ज किए गए। परिजनों ने ऋतुराज को थाने लाए जाने से लेकर अस्पताल में भर्ती कराने और उसकी मौत तक के पूरे घटनाक्रम को लेकर अपना पक्ष रखा।
परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें शुरू से ही सही जानकारी नहीं दी गई और पुलिस कार्रवाई के दौरान कई तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया गया।
*पांच चिकित्सकों की मेडिकल बोर्ड ने किया पोस्टमार्टम*
मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल बोर्ड गठित किया गया। बोर्ड में डॉ. पृथ्वीराज मीणा, डॉ. प्रेरणा चौधरी, डॉ. प्रियांक शर्मा, डॉ. राकेश अटल और डॉ. श्वेता भगवती को शामिल किया गया। पांच चिकित्सकों की टीम ने 6 अक्टूबर को ऋतुराज के शव का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के बाद आवश्यक चिकित्सकीय राय और रिपोर्ट जांच अधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट यह स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी कि ऋतुराज की मौत का चिकित्सकीय कारण क्या रहा और उसके शरीर पर किस प्रकार की चोटें पाई गईं।
*29 सितंबर को अदालत में भी पेश किया था परिवाद*
ऋतुराज की मां हेमा लोहार ने 29 सितंबर को एसीजेएम क्रम संख्या-18 की अदालत में परिवाद पेश किया था। इसमें मुहाना थानाधिकारी सहित पुलिसकर्मियों पर ऋतुराज को अवैध हिरासत में रखने और मारपीट करने के आरोप लगाए गए थे। परिवाद में पुलिसकर्मियों तथा ऋतुराज की मोबाइल लोकेशन की जांच, घटनाक्रम से जुड़े लोगों के बयान दर्ज करने तथा अन्य साक्ष्यों की जांच की मांग की गई थी।
परिवार ने अस्पताल में मौजूद पुलिसकर्मियों पर समझौते का दबाव बनाने के आरोप भी लगाए थे।
*मंदसौर से पहुंचे किसान नेता, निष्पक्ष जांच की मांग*
ऋतुराज की मौत की सूचना के बाद मंदसौर जिले से कई लोग जयपुर पहुंचे। किसान नेता श्यामलाल जोकचंद के साथ मोगिया बावरी समाज के मध्यप्रदेश उपाध्यक्ष भगतराम डाबी, डीएनटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालसिंह रायका, सेवानिवृत्त एडिशनल एसपी भीकाराम रायका, कैलाश बोहरा, अमृतराम हाबरिया, श्यामलाल भाटी एवं लक्की मेव सहित अन्य लोग मौजूद रहे। उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग रखी।
*अब जांच के दायरे में कई अहम सवाल*
ऋतुराज की मौत के बाद अब जांच में कई सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख सवाल यह है कि 22 सितंबर को ऋतुराज को थाने किस परिस्थिति में लाया गया और कितनी देर तक वहां रखा गया। उसके साथ पूछताछ के दौरान क्या हुआ। उसे लॉकअप में क्यों रखा गया। उसकी तबीयत कब और किस परिस्थिति में बिगड़ी।इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि लकी हॉस्पिटल और नारायणा हॉस्पिटल में अलग-अलग नाम से भर्ती कराने की स्थिति कैसे बनी। अस्पताल के रिकॉर्ड में पिता का नाम और पता गलत क्यों दर्ज हुआ। सांप के काटने की बात किस आधार पर सामने आई और एंटीवेनम के 10 इंजेक्शन क्यों लगाए गए। नारायणा और एसएमएस अस्पताल की सीटी स्कैन रिपोर्ट में सामने आई ब्रेन इंजरी किन परिस्थितियों में हुई, यह भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है।
*सीसीटीवी, मोबाइल लोकेशन और मेडिकल रिकॉर्ड होंगे अहम*
जांच में मुहाना थाने के सीसीटीवी फुटेज, थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों की ड्यूटी, ऋतुराज की मोबाइल लोकेशन, पुलिसकर्मियों की मोबाइल लोकेशन, अस्पतालों के सीसीटीवी फुटेज, भर्ती एवं डिस्चार्ज रिकॉर्ड, सीटी स्कैन रिपोर्ट, मेडिकल दस्तावेज और अस्पताल के बिल महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं। साथ ही 22 सितंबर को थाने में मौजूद लोगों के बयान, अस्पताल ले जाने वाले पुलिसकर्मियों के बयान और उपचार करने वाले डॉक्टरों की जानकारी भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
*पुलिस का पक्ष*
मुहाना थाना प्रभारी मुकेश खराड़िया के अनुसार प्रकाश लोहार के खिलाफ प्राप्त परिवाद के संबंध में पूछताछ की गई थी। उन्होंने पुलिसकर्मियों द्वारा ऋतुराज को टॉर्चर किए जाने के आरोपों से इनकार किया। उनका कहना है कि पूछताछ के दौरान ऋतुराज की तबीयत खराब हुई और उल्टी होने पर उसे अस्पताल ले जाया गया। मामले की जांच एसीपी स्तर के अधिकारी द्वारा की जा रही है।
*पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मजिस्ट्रियल जांच पर टिकी नजर*
ऋतुराज की मौत के बाद अब मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मजिस्ट्रियल जांच महत्वपूर्ण हो गई है। एक ओर परिवार पुलिस हिरासत में मारपीट को मौत की वजह बता रहा है, वहीं पुलिस इन आरोपों को नकार रही है। ऐसे में दोनों पक्षों के दावों के बीच जांच से सामने आने वाले साक्ष्य ही घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करेंगे।ऋतुराज के परिजन पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर मनासा खुर्द के लिए रवाना हो गए। परिवार का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि मजिस्ट्रियल जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और यदि जांच में कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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