सिंगोली। श्रावण मास का नाम सुनते ही शिव भक्तों के चेहरे पर एक चमक आ जाती है। सच्चे शिव भक्त 11 मास तक श्रावण मास की प्रतीक्षा करते हैं। जैसा कि सर्वविदित है कि श्रावण मास में सोमवार का विशेष महत्व है। इस दिन शिव भक्त अपने आराध्य की कृपा प्राप्ति के लिए व्रत और पूजा का आयोजन करते हैं। शिव की विशेष पूजा को शिव अभिषेक कहते हैं। हालांकि आप किसी भी दिन शिव का अभिषेक कर सकते हैं। उसके लिए किसी विशेष मुहूर्त आदि को देखने की आवश्यकता नहीं होती है। और श्रावण मास तो वैसे भी शिव को समर्पित है। विक्रम संवत 2082 के श्रावण मास में कुल 4 सोमवार है।
श्रावण मास प्रारंभ :
11 जुलाई शुक्रवार 2025
.पहला श्रावण सोमवार :
14 जुलाई 2025
.दूसरा श्रावण सोमवार :
21 जुलाई 2025
.तीसरा श्रावण सोमवार :
28 जुलाई 2025
.चतुर्थ श्रावण सोमवार :
4 अगस्त 2025
श्रावण समाप्त :
9 अगस्त, 2025 शनिवार
*रुद्राभिषेक के विभिन्न पूजन के लाभ इस प्रकार हैं-*
1- जल से अभिषेक सर्वसुलभ बताया गया है। इससे शिवजी की प्रसन्नता प्राप्त होती है।
2-कुशा जल से अभिषेक करने से रोगों और दुखों का नाश होता है।
3-दही से अभिषेक करने स भवन, संपत्ति, वाहन, पशु सुख की प्राप्ति होती है।
4-इत्र मिश्रित जल से अभिषेक करने से कठिन से कठिन रोग भी दूर हो जाते हैं।
5-शहद युक्त जल से अभिषेक करने से धन में वृद्धि होती है।
6-तीर्थों के जल से अभिषेक करने से मोझ की प्राप्ति होती है।
7-दूध से अभिषेक करने से उत्तम संतान की प्राप्ति होती है।
8-गंगाजल से अभिषेक करने से ज्वर और इसके समान रोग दूर हो जाते हैं।
9-दुग्ध में मिश्री या शर्करा डालकर अभिषेक करने से ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है।
10-घी से अभिषेक करने से वंश विस्तार होता है। मनुष्य बलिष्ठ बनता है।
11-गन्ने के रस से अभिषेक करने से सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है।
12-शिवलिंग पर कच्चे चावल अर्पित करने से धन-संपदा की प्राप्ति होती है।
13-शिवलिंग पर तिल अर्पित करने से रोग और कष्टों का निवारण होता है।
14-शिवलिंग पर जौ चढ़ाने से लंबे समय से चले आ रहे संकट दूर होते हैं।
15-शिवलिंग पर गेहूं चढ़ाने से सुयोग्य पुत्र की प्राप्ति होती है।
16-शिवलिंग पर शमी के पत्ते चढ़ाने से सभी दुखों से छुटकारा मिलता है।
17-शिवलिंग पर आंकड़े के पुष्प अर्पित करने से सांसारिक बंधनों से छुटकारा मिलता है।
ऐसे तो अभिषेक साधारण रूप से जल से ही होता है।
परंतु विशेष अवसर पर या सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि आदि पर्व के दिनों में मंत्र, गोदुग्ध या अन्य दूध मिलाकर अथवा केवल दूध से भी अभिषेक किया जाता है। विशेष पूजा में दूध, दही, घृत, शहद और चीनी से अलग-अलग अथवा सबको मिलाकर पंचामृत से भी अभिषेक किया जाता है। तंत्रों में रोग निवारण हेतु अन्य विभिन्न वस्तुओं से भी अभिषेक करने का विधान है। इस प्रकार विविध द्रव्यों से शिवलिंग का विधिवत अभिषेक करने पर अभीष्ट कामना की पूर्ति होती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि किसी भी पुराने नियमित रूप से पूजे जाने वाले शिवलिंग का अभिषेक बहुत ही उत्तम फल देता है किंतु यदि पारद के शिवलिंग का अभिषेक किया जाए तो बहुत ही शीघ्र चमत्कारिक शुभ परिणाम मिलता है। रुद्राभिषेक का फल बहुत ही शीघ्र प्राप्त होता है।