चीताखेड़ा । भारतीय संस्कृति में पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक संबंधों की प्रगाढ़ता को और अधिक सशक्त करता है। रिश्ते और अटूट पर प्रेम की रेशम की डोर बांधी। बहने अपने भाईयों के घर तो पहुंची ही और हर घर में राखी बांधी गई। धर्म शास्त्रों के अनुसार श्रावण पूर्णिमा तिथि को शुभ मुहूर्त में रक्षाबंधन पर शनिवार पूर्णिमा,सावन श्रवण नक्षत्र में माथे पर तिलक लगाकर भाई बहन के बीच अटूट विश्वास और प्रेम के इस त्योहार पर बहनों ने भाईयों की कलाई पर स्नेह और सौहार्द का रेशम का धागा बांधा। शुभ मुहूर्त में बहनों ने भाईयों की कलाई पर स्नेह व सौहार्द की रेशम के डोर रक्षा सूत्र बांधकर भाई ने बहन का रक्षा की जीवन यात्रा में उनका मार्ग दर्शन और समर्थन देने का वचन दिया, वहीं बहनों ने भाईयों की लंबी उम्र की प्रार्थना की। पूरा सावन भी चला गया पर क्षेत्र में ठीक से नहीं बरसे मेघ, सावन भी सुखा निकल गया। बाजार में भी रंग बिरंगी राखियों से गुलजार दिखाई दिया। बहनों ने सजाई भाईयों की कलाई पर स्नेह रेशम की डोर। फेंसी राखियों का चलन बढ़ा---आधुनिकता एवं फैशन के दौर में पुरानी पसंद रेशमी व सूती धागे का चलन घट गया है और इन राखियों की जगह फैंसी राखियों का चलन बढ़ गया है। इसी के चलते बाजार में छोटे बच्चों के लिए कार्टून मोंटू पतलू, इलेक्ट्रॉनिक राखी,छोटा भीम, स्पाइडर मैन, डोरी मोन,पबजी आदि राखियां आ गई है। इस बार में 5 रुपए से लेकर 400 रुपए तक की राखियां बिकी। क्षेत्र खेती किसानी हर होने के कारण बाजारों की रौनक त्योहारी सीजन में जोरदार देखने को मिली है। जोधपुर मिठाई व्यापारी शर्मा ने बताया कि त्यौहारी सीजन में ग्राहकी तो ठीक चली पर ग्राहकों ने जमकर मिठाईयों की खरीदारी की। इस बार मंहगाई की मार ग्राहकों तो रही पर बहनों ने उत्साह के साथ शापिंग की। मिठाई व्यापारी ईश्वर लाल माली का कहना है कि हर त्योहार से यह रक्षाबंधन पर्व बेहतर रहा। मिठाई तो खूब बनाई और बिक भी रही लेकिन गत वर्ष की तुलना में खूब मिठाई ही बिकी। राखी व्यापारी मुकेश माली का कहना है कि बहनों ने अपने भाईयों के लिए जमकर राखियां खरीदी। मौसम भी पूरी तरह से खुला रहा,ग्राहकी अच्छी रही।कपड़ा व्यापारी रजनीश दक ने बताया कि कपड़े का व्यवसाय गत वर्ष रक्षाबंधन की तुलना में इस वर्ष अच्छा रहा है।इस महंगाई की मार के बावजूद भी भाई-बहन के पर्व रक्षाबंधन पर बहनों द्वारा अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर मुंह मीठा कराया और रक्षा का वचन दिया इसी के साथ भाई ने बहन को आर्शीवाद के रूप में (उपहार स्वरूप) गिफ्ट दिया।