चीताखेड़ा -19 सितंबर। जीरन तहसील क्षेत्र में खरीफ सीजन की मुख्य पीला सोना कहे जाने वाली सोयाबीन फसल पर पीला मोजेक वायरस, इल्लियों के प्रकोप व अफलन से 90 प्रतिशत फसलें नष्ट हो चुकी है तो वहीं मुंगफली में भी अतिवृष्टि से जमीन में कीड़ा लगने एवं फफूंद आ जाने से सडकर पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। जिससे किसानों की किस्मत पर पर भी पीला मोजेक छा गया। उड़द,तिल आदि फसलों को भी लगातार बारिश से 80 प्रतिशत नुकसान पहुंचा है। बारिश के चलते किसानों के साथ-साथ ही पशुओं के मुंह आया निवाला भी छीन लिया है। किसानों के अनुसार सोयाबीन की बोनी में किए गए खर्च को भी निकलना मुश्किल हो गया है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष विनोद दक ने कहा कि चीताखेड़ा ,घसुंडी जागीर,अमावली जागीर ,हरनावदा पंचायत क्षेत्र के सभी गांव के किसानों के खेतों में खड़ी खरीफ सीजन की सोयाबीन फसलों में हुए नुकसान को लेकर किसानों के समर्थन में मुआवजा और बीमा राशि हेतु अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा गया है। कहा कि सरकार को बिना सर्वे मुआवजा एवं बीमा राशि शीघ्र ही खातों में डालना चाहिए। नहीं दिए जाने पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। कहा कि क्षेत्र के खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसलों में करीब 90% फसलों में पीले मोजेक वायरस का प्रकोप है, जिससे इस बार पैदावार नहीं के बराबर हो रही है। सोयाबीन के पौधों में लगातार पीले मोजेक वायरस अधिक होने से पौधों में लगे फल का ग्रोथ रुक गया है, साथ ही लगातार बारिश से पीले पौधों में सड़न लगने से फसले नष्ट हो गई है , जिस से शत-प्रतिशत नुकसान हुआ है। कीटनाशक व अन्य दवाइयों का छिड़काव भी बेअसर हुआ है। किसानों के अनुसार इस साल सोयाबीन एवं अन्य रबी की फैसले मूंगफली, उड़द आदी फैसले बोनी में किए गए खर्च को भी निकालना मुश्किल हो गया है ,जिसे रबी की फसल भी प्रभावित होगी। मुंगफली में कीड़ा व फफूंद लगने से जमीन में ही सड़ गई है- किसानों ने बताया कि 15 जून के बाद खरीफ सीजन की मुंगफली, सोयाबीन फसल की बुवाई की गई थी। शुरुआती दौर में खेती अच्छी थी और किसानों को अच्छे पैदावार की उम्मीद थी। इसी दौरान लगातार सप्ताह भर से अधिक दिनों तक लगातार बारिश होने से पीला मोजेक वायरस का प्रकोप शुरू हो गया जो धीरे-धीरे पूरी फसलों को बर्बाद कर गई। मुंगफली फ़सल को जमीन में पानी भराव हो जाने से कीड़ा व फफूंद लगने से सड़न पैदा हो गई है। किसानों का दुखड़ा -सोयाबीन की फसल क्षेत्र में इस बार चौपट हो चुकी है, फसलों पर लगने वाली बीमारी की जानकारी प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों को भी समय रहते दे चुके हैं ,इसके बाद भी अभी तक सर्वे का कार्य शुरू नहीं हुआ है। 2 बीघा खेत में लगी सोयाबीन की फसल पूरी तरह से सड़ गल कर नष्ट हो चुकी है, जिससे ट्रैक्टर टिल्लर से हकाई की गई है। सोयाबीन का एक दाना भी घर नहीं ले जा पाया। रामविलास सोलंकी, किसान चीताखेड़ा पीठ गांव के किसान नरेश पाटीदार ने कहा कि 30 बीघा खेत में सोयाबीन और 15 बीघा खेत में मुंगफली सब चौपट हो गई। किसान आज सबसे बड़े आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है बीमा कंपनी को बीमा राशि और सरकार को बिना सर्वे के मुआवजा देना चाहिए । बेमौसम बारिश ने किसानों की आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है। हमें ऊपर से फसलों में हुए नुकसानी सर्वे हेतु आदेश मिले हैं और हमने किसानों के खेतों में पहुंच कर नुकसानी आंकलन निकाल कर हमारी सर्वे रिपोर्ट भेज दी है। हमने देखा है किसानों को नुक़सान हुआ है। ऊपर से मिले आदेशानुसार हम किसानों से खाते खसरे की नकल, बैंक पासबुक, आधार कार्ड और मोबाइल नंबर कागज ले रहे हैं। उम्मीद है किसानों को लाभ मिलेगा। पटवारी संदेश चेलावत, हल्का नंबर 8 चीताखेड़ा