चीताखेड़ा -20 सितंबर। श्राद्ध पक्ष पूर्वजों के प्रति श्रद्धा सम्मान प्रकट करने के साथ कलात्मक सौंदर्य बोध का संदेश देने वाला पर्व है। 16 दिनों तक चलने वाला यह देवी से संबंधित उपासना पर्व है। बेटियां अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए भाद्रपद की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक संजा देवी का पूजन करती है। मालवा अंचल में घर की बेटियां दरवाजे के बाहर दीवार पर गोबर से संजा बनाती हैं। पूर्वज देते हैं आशीर्वाद -श्राद्ध पक्ष के इन सोलह दिनों में घर की बेटियां प्रातः स्नान करके अपने घर की दहलीज को गोबर से लीप पोतकर पवित्र करती है। द्वार पर दीपक प्रज्वलित कर पुरखों का स्वागत करती है। मान्यता है कि पूर्वज प्रसन्न होकर बेटियों को आशीर्वाद देते हैं। पूजा अर्चना कर भोग लगाया जाता है। विभिन्न आकृतियों में समाया संसार --परंपराओं के अनुसार एकम को पांचा, द्वितीय को बीज, तृतीय को छाबड़ी,चतुर्थ को बिजोरा, पंचमी को गौरा पार्वती, षष्ठी को चौपड़ा, सप्तमी को सप्तर्षि तारा मंडल, अष्टमी को फूलों की आकृति, नगाड़े, ढोल, नवमी को डोकरा -डोकरी, दशमी को बिजना पंखा, एकादशी को केले का झाड़ू, द्वादशी को मोर- मोरनी, त्रयोदशी को किलाकोट की आकृति बनाई गई है,जो अमावस्या तक रहती हैं। 16 दिनों तक चलने वाला यह पितृ मोक्ष अमावस्या को संजा पर्व का विर्सजन समारोह पूर्वक सम्पन्न हुआ। 22 सितंबर रविवार से शुरू शक्ति की भक्ति का पर्व-इस बार नौ नहीं,दस दिन के होंगे शारदीय नवरात्र--शारदीय नवरात्र का पर्व इस बार भी विशेष संयोग के साथ 22 सितंबर रविवार से शुरू होने जा रहा है। सामान्य: नवरात्र नौ दिन का होता है,लेकिन इस बार यह पर्व दस दिन तक मनाया जाएगा। नवरात्र में चतुर्थी तिथि दो दिन पड़ रही है। 25 और 26 सितंबर दोनों दिन चतुर्थी विद्यमान रहेगी।इस कारण श्रद्धालुओं को मां दुर्गा की आराधना और अनुष्ठान के लिए एक दिन अतिरिक्त मिलेगा। नवरात्र का शुभारंभ 22 सितंबर सोमवार से होने जा रहा है। 30 सितंबर मंगलवार को दुर्गा महाष्टमी व 2 अक्टूबर गुरुवार को विजयदशमी दशहरा पर्व होगा। ऐसी मान्यता है कि नवरात्र सोमवार से आरंभ होता है,तब मां दुर्गा गज (हाथी ) पर सवार होकर आती है। गज की सवारी सुख - समृद्धि और ऐश्वर्य का प्रतीक मानी जाती है। इसके चलते इस बार अच्छी वर्षा का योग है। कृषि क्षेत्र के लिए भी यह नवरात्र शुभ कार्य रहेगा।