नीमच । दिनदहाड़े हत्या के प्रयास जैसी सनसनीखेज वारदात करने हिमाकत हो या सरेआम शहर के बाजारों में गुंडागर्दी का खौफनाक नजारा... दहशत से लबरेज ये संगीन अपराध नीमच शहर की शांत फिजा में जहर घोलने और भय का वातावरण निर्मित करने के लिए काफी है। अब सवाल यह है कि क्या नीमच शहर को भविष्य में अब यही सब देखना ह? जिसकी शुरुआत इंसानियत, मानवता और धर्मपरायण व्यक्तित्व के खिलाफ रची जा रही साजिशों और षडयंत्रों से की जा चुकी है। कहने को वो शराब ठेकदार है, लेकिन इसके ठीक विपरीत धर्म की ध्वजा थामने वाले मानवता की मिसाल भी है। जहां धर्म के प्रति आस्था और समाज के प्रति सेवा का भाव दिखावे का नहीं दिल से है। शहर में अराजकता का माहौल व्याप्त करने वाली ताकतें सरकारी एजेंसियों को टूल बनाकर एक धर्मपरायण व्यक्तित्व के खिलाफ इस्तेमाल करना चाहती है। इस खौफनाक खेल का पहला हथियार समाज सेवी अशोक अरोरा के खिलाफ उन्हें जान से मारने की नियत से उस वक्त चलाया गया जब 4 फरवरी 2024 को शहर के लायंस पार्क क्षेत्र में सुपारी किलर बदमाशों ने अपनी कार में ऑफिस से घर लौट रहे अशोक अरोरा गंगानगर पर अंधाधुंध फायरिंग की, लेकिन नापाक इरादों से रची गई यह खौफनाक साजिश नाकाम रही। अब एक बार फिर वक्त को दोहराने की साजिशों पर काम किया जा रहा है। इस खौफनाक कहानी को अंजाम देने का तरीका, जो धनराज लाला चौधरी की कथित शिकायतों के रूप में सामने आ रहा है। वहीं लाला चौधरी जिसके मुंह पीड़ित महिला के एक बयान ने तमाचा जड़ दिया। वहीं लाला चौधरी जिसने खुद एक अबला का घर हड़प लिया और मिथ्या आरोप समाज सेवी अशोक अरोरा पर लगाए।  वैसे ये साजिशें और षडयंत्र अकेले अशोक अरोरा के खिलाफ ही नहीं बल्कि हर उस शख्स के खिलाफ है, जो अशोक अरोरा के व्यक्तित्व को गहराइयों से जानता और समझता है। शहर में अमन चैन और शाति की खैरियत चाहता है। इसके विपरीत जो मंसूबे पनप रहे हैं वो शहर की सुरक्षा में सेंध लगाकर मानवता को रौंदना चाहते हैं। इसको लेकर चर्चाओं के साथ ही क्रिया-प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो चुका है और चर्चाओं से कही अधिक गंभीरता इस मसले पर चिंतन की भी हो रही है कि आखिर ये साजिशें कब तक जन्म लेती रहेंगी?