नीमच। शहर के स्कीम नंबर 36 में चल रहे एक कथित ‘शेखावत क्लीनिक’ पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह क्लीनिक बिना किसी सरकारी लाइसेंस, डॉक्टर की मान्यता और मेडिकल रजिस्ट्रेशन के इलाज कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां गलत दवाइयां और इंजेक्शन देकर मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ रहा है।शहर के बीचों बीच स्थित इस क्लीनिक में रोजाना दर्जनों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। क्लीनिक के बाहर लगे बोर्ड पर ईलाज करने वाले डॉक्टर की डिग्री या रजिस्ट्रेशन नंबर प्रदर्शित नहीं किया गया है। मरीजों से परामर्श शुल्क के साथ महंगी दवाइयाँ ली जाती हैं, लेकिन इलाज का कोई रिकॉर्ड या प्रिस्क्रिप्शन नहीं दिया जाता। यदि कोई भूलवश यहां बिल भी मांग ले तो उसे भादवामाता क्लिनिक संबधित बिल पकड़ा दिया जाता है। ऐसे में कई लोगों ने बताया कि यहां इलाज कराया, वहां बीमारी ठीक होने की बजाय और बढ़ गई। एक मरीज ने नाम न बताने की शर्त पर यह भी कहां कि यहां ईलाज के नाम पर लूट होती है और छोटी बिमारी, जैसे सर्दी जुखाम, बुखार को भी बड़ी बिमारी बताकर उनके ही मेडिकल से दवाईयां लेने के मजबुर किया जाता है। बता दे कि इस मामले में हमारी टीम ने पड़ताल ही और नीमच जिले में संचालित सभी क्लिनिको के पंजीकरण की जानकारी खंगाली, पड़ताल में जहां तक अधिकांश क्लिनिक नियमानुसार पंजीकृत थे, लेकिन शेखावत क्लिनिक का दूर — दूर तक कही लिस्ट में नाम नही है। यह कहना* “नाम न बताने की शर्त पर मरीज ने कहा मुझे बुखार था, क्लीनिक से इंजेक्शन लगवाया तो कुछ ही घंटों में तबीयत और बिगड़ गई। बाद में सरकारी अस्पताल जाना पड़ा।” *हुई शिकायत* स्थानीय लोगों ने इस मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग से की है। विभाग की इस मामले में मिलीभगत सामने आई है, नीमच जिले के ही भादरवामाता में अवैध क्लिनिक संचालित करने पर कोई कार्रवाई नही की गई, जिसके बाद 36ए में अवैध रूप से संचालित क्लिनिक की कई शिकायते मिलने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नही की जा रही है। स्थानीय निवासियों ने कहा— “नीमच में कई जगह ऐसे फर्जी क्लीनिक चल रहे हैं। गरीब और अशिक्षित लोग इनके झांसे में आ जाते हैं। प्रशासन को नियमित जांच करनी चाहिए। अपील बेअसर स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की थी कि वे किसी भी क्लीनिक या डॉक्टर से इलाज कराने से पहले उसका रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस अवश्य जांचें। साथ ही, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना विभाग को दें। मामले में सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग क्या इतना मजबूर हो गया कि अब शिकायतो का इंतेजार करेगा। यहां जिल में संचालित क्लिनिको का आनलाईन रिकॉर्ड संबधित विभाग के पास मौजुद होता है, उसके बाद भी विभाग मात्र अपील करने तक ही अपनी इतिश्री करने में आमदा रहता है। जबकि छिंदवाडा में हुए कोल्ड सिरप मामले से नीमच जिले के स्वास्थ्य विभाग को भी सबक लेना जरूरी है। यहां शेखावत क्लिनिक जैसे फर्जी और झोलाछाप डॉक्टर कभी भी छिंदवाड़ा की घटना को नीमच में दौहरा सकते है।