नीमच । 6 अप्रैल को भाजपा के स्थापना दिवस पर नीमच में होने जा रहे भव्य जिला कार्यालय के भूमिपूजन का 'निमंत्रण पत्र' अब महज एक कार्ड नहीं, बल्कि राजनीतिक गलतियों, मनमर्जी और गुटबाजी का 'अंबार' बन गया है। अब तक बवाल सिर्फ स्थानीय नेताओं (नगर पालिका अध्यक्ष और पूर्व जिलाध्यक्ष) के नाम गायब होने पर था, जिसे 'हाईकमान की गाइडलाइन' बताकर दबाने की कोशिश हो रही थी। लेकिन अब जो नई और हास्यास्पद चूकें सामने आई हैं, उन्होंने स्थानीय संगठन की पूरी कार्यप्रणाली और गंभीरता की पोल खोलकर रख दी है। ग्वालियर के कार्ड ने किया नीमच के 'बहाने' को बेनकाब स्थानीय नेताओं के नाम काटने पर तर्क दिया गया था कि 18 जिलों के लिए भोपाल से एक ही गाइडलाइन आई है। लेकिन नीमच के कार्ड में सिर्फ स्थानीय ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के कई बड़े दिग्गज नेताओं के फोटो तक गायब कर दिए गए हैं। इस 'हाईकमान की गाइडलाइन' वाले बहाने की हवा तब निकल गई, जब ग्वालियर में होने वाले इसी भूमिपूजन कार्यक्रम का कार्ड सामने आया। ग्वालियर के निमंत्रण पत्र में राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय नेताओं के फोटो बकायदा सम्मान के साथ लगाए गए हैं। साफ है कि भोपाल की गाइडलाइन की आड़ में नीमच में भारी लापरवाही बरती गई है। प्रोटोकॉल का मजाक: पूर्व मंत्री और वरिष्ठ विधायकों को जिलाध्यक्ष के भी नीचे खिसकाया! निमंत्रण पत्र में पद, वरिष्ठता और राजनीतिक प्रोटोकॉल की जिस तरह धज्जियां उड़ाई गई हैं, वह हैरान करने वाला है। कार्ड में विधायकों के नामों की जमावट को देखकर एक ही सवाल उठता है— "क्या यही है भाजपा का प्रोटोकॉल?" कार्ड में नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार का नाम तो बकायदा ऊपर सम्मान के साथ लिखा गया है। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि जावद के कद्दावर विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा का नाम नीमच विधायक और यहाँ तक कि जिलाध्यक्ष के भी बाद (नीचे) लिखा गया है। संगठन और सरकार में एक पूर्व मंत्री और वरिष्ठ विधायक का जो कद होता है, उसे देखते हुए यह एक बहुत बड़ा राजनीतिक अपमान है। इसी तरह, मनासा विधायक अनिरुद्ध माधव मारू का नाम भी नीमच विधायक और जिलाध्यक्ष के बाद नीचे डाल दिया गया है। राजनीतिक और प्रशासनिक प्रोटोकॉल के लिहाज से एक चुने हुए विधायक का कद जिलाध्यक्ष से ऊपर होता है, या कम से कम जिले के सभी विधायकों के नाम एक समान श्रेणी में होने चाहिए थे। लेकिन कार्ड में विधायकों के बीच किया गया यह 'ऊपर-नीचे' का खेल सीधे तौर पर संगठन के भीतर चल रही खेमेबाजी की चुगली कर रहा है। रातों-रात बदल गया जिलाध्यक्ष का नाम: पार्टी का कार्ड या पारिवारिक न्यौता? चूकों का सिलसिला यहीं नहीं रुकता। सबसे बड़ी और हैरान करने वाली चूक जिलाध्यक्ष के नाम को लेकर हुई है। नीमच की वर्तमान जिलाध्यक्ष को पूरी पार्टी और शहर 'वंदना खंडेलवाल' के नाम से जानता है। लेकिन, इस ऐतिहासिक कार्ड पर उनका नाम 'वंदना नारायण खंडेलवाल' छाप दिया गया है। (यहाँ 'नारायण' उनके पति का नाम है)। राजनीति में एक स्थापित महिला नेत्री के नाम के बीच आधिकारिक कार्ड पर पति का नाम जोड़ देना यह दर्शाता है कि ड्राफ्टिंग में कितनी अपरिपक्वता बरती गई है। लोग चटखारे लेकर पूछ रहे हैं कि यह भाजपा कार्यालय का कार्ड है या कोई पारिवारिक न्यौता? चूकों का पुलिंदा और 'अपनों' का अपमान यह निमंत्रण पत्र शुरू से ही विवादों का केंद्र बन गया है: * 'नगर सत्ता की मुखिया' गायब: जिस नगर पालिका ने करोड़ों की जमीन दी, उसी की अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा का नाम कार्ड में नहीं है। * 'प्रोजेक्ट के शिल्पकार' गायब: जिनके कार्यकाल में जमीन मिली और नींव रखी गई, उन पूर्व जिलाध्यक्ष पवन पाटीदार को भी किनारे कर दिया गया। * राष्ट्रीय दिग्गज गायब: ग्वालियर के कार्ड में फोटो हैं, लेकिन नीमच के कार्ड से राष्ट्रीय/प्रादेशिक नेताओं के फोटो भी नदारद हैं। * वरिष्ठता का अपमान: पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा और विधायक अनिरुद्ध माधव मारू का नाम जिलाध्यक्ष के भी नीचे लिखकर प्रोटोकॉल तोड़ा गया। * नाम में गड़बड़ी: जिलाध्यक्ष के नाम में पति का नाम जोड़कर इसे पारिवारिक कार्ड जैसा बना दिया गया। जश्न का माहौल बना मजाक भारतीय जनता पार्टी 'टीनशेड' के संघर्षपूर्ण दौर से निकलकर अब आलीशान 'अभेद्य किलों' में बैठने जा रही है। पार्टी के लिए यह गर्व का मौका था। लेकिन नीमच में कार्ड छपाई में हुई इन अनगिनत 'ऐतिहासिक चूकों', वरिष्ठ नेताओं के अपमान और 'हाईकमान' के नाम पर बोले गए झूठ ने इस पूरे जश्न को मजाक बना दिया है। अब देखना यह है कि इतनी भारी फजीहत के बाद स्थानीय संगठन इन गलतियों को सुधारता है या कोई नया बहाना लेकर आता है।