बंजारा समाज में ‘झगड़ा प्रथा’ का कहर: बचपन की सगाई बनी विवाद की जड़, चार गांवों में तनाव
29 Apr 2026
NEEMUCH NEWS
नीमच। नीमच जिले में बंजारा समाज की एक पुरानी कुप्रथा ‘झगड़ा प्रथा’ ने एक बार फिर गंभीर सामाजिक संकट खड़ा कर दिया है। 20 अप्रैल से लापता 16 वर्ष 9 माह की नाबालिग लड़की के मामले ने चार गांवों—ठीकरिया, जोरावरपुरा, टाटियाखेड़ी और मालाहेडा—को तनाव की आग में झोंक दिया है।
चार गांवों में बढ़ा टकराव
घटना के केंद्र में ठीकरिया गांव है, जहां लड़की का मायका है। मालाहेडा गांव में उसकी बचपन में सगाई तय की गई थी। इसी बीच जोरावरपुरा निवासी पिंटू बंजारा द्वारा लड़की को भगाने का आरोप सामने आया है। वहीं टाटियाखेड़ी में रहने वाले गुड्डा बंजारा, जिन्होंने लड़की को वापस लाने की जिम्मेदारी ली थी, असफल रहने पर उनके घर पर हमला, तोड़फोड़ और आगजनी की घटना हुई।
‘झगड़ा प्रथा’ बनी विवाद की जड़
बंजारा समाज में प्रचलित ‘झगड़ा प्रथा’ के तहत, यदि तय रिश्ते के अनुसार विवाह नहीं होता, तो संबंधित पक्ष पर आर्थिक दंड लगाया जाता है, जो कई बार लाखों रुपये तक पहुंच जाता है। इस दबाव के चलते परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से टूट जाते हैं।
बचपन की सगाई पर उठे सवाल
इस पूरे विवाद की जड़ बचपन में तय की गई सगाई है। जब लड़की बालिग होने के करीब पहुंची, तो उसकी पसंद बदल गई और वह किसी अन्य युवक के साथ चली गई। लेकिन समाज की परंपरा इसे स्वीकार नहीं कर पा रही है, जिससे विवाद हिंसक रूप ले रहा है।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने नाबालिग लड़की के मामले में POCSO Act और अपहरण का प्रकरण दर्ज किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र में पुलिस बल तैनात किया गया है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
सामाजिक चेतावनी
यह घटना समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े करती है—क्या बचपन में तय किए गए रिश्ते आज के समय में उचित हैं? क्या व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पसंद का कोई महत्व नहीं? विशेषज्ञों का मानना है कि ‘झगड़ा प्रथा’ जैसी कुप्रथाएं न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि समाज के विकास में भी बाधा बन रही हैं। समय रहते इन पर रोक लगाना जरूरी है, अन्यथा ऐसे विवाद आगे भी हिंसक रूप ले सकते हैं।