जयपुर। देशभर में यात्री बसों की फिटनेस और सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मध्य प्रदेश के नीमच क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। राजस्थान के जयपुर में परिवहन विभाग की जांच के दौरान यह खुलासा हुआ है कि 15 दिन पहले ही नीमच आरटीओ में दो ऐसी बसों का पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) कर दिया गया, जिनकी बॉडी तक अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुई थी। बिना नीमच पहुचे ही बसों का रजिस्ट्रेशन कर दिया गया। जानकारी के अनुसार, बस संख्या MP-44-ZG-9665 और MP-44-ZG-9465 का करीब 15 दिन पहले नीमच आरटीओ में बकायदा पंजीयन कराया गया था। नियमानुसार किसी भी व्यावसायिक वाहन के रजिस्ट्रेशन से पहले आरटीओ अधिकारियों द्वारा उसका भौतिक सत्यापन और निरीक्षण करना अनिवार्य होता है लेकिन जयपुर आरटीओ (प्रथम) की टीम ने जब जयपुर के आमेर रोड स्थित दिल्ली रोड़ खोले के हनुमान स्थित गोविन्द वाटिका क्षेत्र में एक अवैध बस बॉडी बिल्डिंग यूनिट पर औचक कार्रवाई की, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। नीमच में दर्ज हो चुकीं ये दोनों बसें कभी मध्य प्रदेश पहुंची ही नहीं थीं, बल्कि जयपुर के इसी कारखाने में अभी निर्माणाधीन अवस्था में खड़ी थीं। यानी बिना बस के अस्तित्व में आए ही कागजों पर उसका रजिस्ट्रेशन नंबर जारी कर दिया गया। मामला उजागर होने के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। जयपुर आरटीओ की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब दोषी बस मालिकों, अवैध रूप से बॉडी बनाने वाले कारखाने के संचालक मुबीन पिता यासीन और नीमच आरटीओ के संबंधित पंजीयन अधिकारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। यह मामला न सिर्फ एक प्रशासनिक भ्रष्टाचार को दर्शाता है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ किए जा रहे बड़े खिलवाड़ को भी उजागर करता है। अब इस बात की विस्तृत जांच की जा रही है कि बिना गाड़ी को देखे और बिना किसी भौतिक निरीक्षण के मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने इस फर्जीवाड़े को अंजाम कैसे दिया और इसके पीछे कौन-सा बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।