रतनगढ़। नगर परिषद रतनगढ़ में व्याप्त अव्यवस्थाओ के चलते नगर पिछले छह दिनों से गंदगी के ढेर में तब्दील हो गया है।6 माह से वेतन न मिलने से परेशान व त्रस्त सफाई कर्मचारियों ने अब अपना धैर्य खो दिया है।नगर परिषद में मोदी जी के स्वच्छता अभियान को पलिता लगाया जा रहा है।खास बात यह है।कि हड़ताल कर रहे सफाई कर्मचारियों ने समाधान के लिए एक व्यवहारिक रास्ता भी सुझाया है,लेकिन नगर परिषद के जिम्मेदार अब भी चुप्पी साधे बैठे हैं।
​कर्मचारी बोले- "हम भी समाधान चाहते हैं,पर नगर परिषद गंभीर नहीं"हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे भी नहीं चाहते कि नगरवासी गंदगी में रहें।कर्मचारियों ने एक प्रस्ताव दिया है।कि​"हमें पूरे 6 माह का बकाया वेतन एक साथ नहीं चाहिए।यदि हमे केवल दो महीने का वेतन भी जारी कर दे,तो हम तत्काल हड़ताल समाप्त कर अपने काम पर लौट आएंगे।बाकी का वेतन अगले महीने दे दिया जाए।इसमें लंबी चर्चा या बड़े प्रशासनिक प्रयास कीआवश्यकता ही नहीं है,बस दृढ इच्छाशक्ति की कमी है।"
अध्यक्ष के दावों पर उठे सवाल-नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती सुगनाबाई कचरूलाल गुर्जर ने भी नगर समस्या एवं सुझाव ग्रुप मे एक प्रेस नोट के माध्यम से हड़ताल कर रहे सफाई कर्मचारियों की मांगों को 'जायज' माना है।हालांकि कर्मचारियों और आम जनता का कहना है।कि जब मांगें जायज हैं।और रास्ता भी सामने है।तो फिर इसे सुलझाने में क्या बाधा है...?जनता का सीधा आरोप है।कि अध्यक्ष का बयान केवल अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा है।
नगर बन रहा है। बीमारियों का केंद्र-
सफाई व्यवस्था ठप्प होने से रतनगढ़ के मुख्य बाजारों,गली मोहल्लों और चोक चौराहों,शिक्षा के मंदिरों के आसपास जगह जगह कचरे व गंदगी के ढेर लगने लग गए हैं।एवं इनसे उठने वाली दुर्गंध से आम नागरिकों, व्यापारियों और स्कूली बच्चों का निकलना मुश्किल हो रहा है। मच्छरों के प्रकोप के कारण मौसमी और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी सिर पर मंडरा रहा है।
*जनता की मांग:- वैकल्पिक राजनीति नहीं,समाधान चाहिए-स्थानीय नागरिकों का कहना है।कि नगर परिषद का काम केवल 'शासन को अवगत कराना' ही नहीं,बल्कि नगर की सफाई व्यवस्था बनाए रखना भी है।यदि कर्मचारी काम करने को तैयार हैं,तो परिषद को तत्काल उनके 2 माह के वेतन की व्यवस्था कर इस 'स्वच्छता संकट' को खत्म करना चाहिए।​फिलहाल पूरा नगर राजनीतिक व प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ रहा है।अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या परिषद मे बेठे निर्वाचित जनप्रतिनिधि व प्रशासन कर्मचारियों के इस सीधे-सपाट और व्यावहारिक प्रस्ताव को स्वीकार कर नगर को राहत देगा।या नगर वासियों को और अधिक बदहाली का सामना करना पड़ेगा?