रतनगढ़ । समय-समय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान का हवाला देकर केवल फोटो खिंचवाने और माला पहनाने के शौकीन कुछ नेता झाड़ू हाथ में लेकर सफाई कर्मियों के आगे खड़े हो जाते हैं। इसका उद्देश्य केवल यह जताना होता है कि वे नगर में स्वच्छता अभियान के बड़े समर्थक हैं।
यदि वास्तव में नगर में फैली गंदगी और स्वच्छता की बदतर स्थिति को लेकर उनके मन में थोड़ा भी दुख या पश्चाताप है,तो उन्हें तुरंत वास्तविकता में झाड़ू उठानी चाहिए।
जब तक सफाई कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त नहीं होती, तब तक उन्हें खुद नगर की गली- मोहल्लों की सफाई करके दिखानी चाहिए।इससे संभव है कि नाराज नगर वासियों का भी उन्हें थोड़ा बहुत समर्थन मिल सके।इसके अलावा,विधायक ओम प्रकाश सकलेचा जी के सामने चाहे व्यापारी के रूप में, चाहे प्रबुद्ध वर्ग के रूप में, या वरिष्ठ नेताओं के रूप में नगर के कुछ गिने- चुने चेहरों को लाकर नागरिकों के भारी समर्थन का दावा करने वाले इन 'नेताजी' को इस परिस्थिति में भी आगे आना चाहिए।उन्हें इस पूरे प्रबुद्ध वर्ग के हाथों में झाड़ू पकड़ाकर स्वयं भी सड़क पर उतरकर झाड़ू उठानी चाहिए।वर्तमान में रतनगढ़ नगर में इतनी भयावह स्थिति उत्पन्न हो चुकी है कि यहाँ एक पुरानी कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है
"जब रोम जल रहा था, तब नीरो बंसी बजा रहा था।,इन सब में एक और विशेष बात बड़ी दयनिय एवं निराशाजनक है कि जिला प्रशासन में बैठे सभी उच्च अधिकारियों को पिछले 8 दिनों से चल रही स्वच्छता कर्मियों की हड़ताल एवं नगर में चहूं और फैली गंदगी के ढेर जैसी इस गंभीर समस्या की जानकारी होने के बाद भी किसी प्रकार का कोई समाधान नहीं निकलना जहां स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का तो नकरापन साबित कर ही रहा है प्रशासन की भी नाकामी को उजागर कर रहा है।