नीमच। जिले में यातायात थाना प्रभारी सोनू बडगूजर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्प्रिंगवुड स्कूल के प्रबंधन ने यातायात पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कलेक्टर के साथ-साथ एसपी को भी एक लिखित आवेदन सौंपा है। स्कूल प्रबंधन का आरोप है कि यातायात थाना प्रभारी द्वारा चुनिंदा रूप से सिर्फ उनके विद्यालय की बसों को ही निशाना बनाया जा रहा है,जबकि जिले के अन्य स्कूलों की बसों की कोई जांच नहीं की जा रही है,जो पूरी तरह से द्वेषतापूर्ण कार्रवाई को दर्शाता है। जानकारी अनुसार,नवीन सत्र प्रारंभ होने के बाद से स्कूल की बसों की तीन बार चेकिंग की जा चुकी है और सभी दस्तावेज पूरी तरह वैध पाए गए हैं। इसके बावजूद,स्कूल की छुट्टी के समय बसों को रोककर विद्यार्थियों को परेशान किया जाता है। बीते दिन स्कूल बस क्रमांक एमपी 44-09-7817 को पूर्ण दस्तावेज होने के बाद भी नियमों के विरुद्ध जब्त कर डेढ़ घंटे तक थाने में खड़ा रखा गया और बाद में बिना किसी ठोस कारण के छोड़ दिया गया। प्रबंधन का यह भी कहना है कि पुलिस द्वारा इस तरह की कार्रवाई के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर विद्यालय की छवि को जानबूझकर धूमिल किया जा रहा है। स्कूल प्रतिनिधियों ने एसपी और कलेक्टर से इस मनमाने रवैये और द्वेषपूर्ण कार्रवाई को तुरंत रोकने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है ताकि छात्र-छात्राओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
यह होती है परेशानियां-छोटे बच्चे होते है परेशान-स्कूल छूटने के बाद रास्ते में बस रोके जाने और उसे थाने ले जाए जाने से कम उम्र के मासूम बच्चे काफी घबरा जाते हैं और मानसिक रूप से परेशान होते हैं।
अभिभावक की चिंता-बच्चों के तय समय पर घर न पहुंच पाने के कारण माता-पिता और अभिभावक अत्यधिक तनाव और गहरी चिंता होती है।
प्रतिद्वंदी स्कूल से हाथ मिलाकर टारगेट करने की आशंका-शहर के अन्य विद्यालयों की बसों को नजरअंदाज कर सिर्फ एक ही स्कूल को बार-बार निशाना बनाए जाने से किसी प्रतिद्वंदी स्कूल के इशारे पर यह कार्रवाई होने की प्रबल आशंका है।
स्कूल की क्षमता और छवि पर असर,पुलिस द्वारा केवल एक ही स्कूल की बसों के चेकिंग फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने से अभिभावकों के बीच संस्थान की साख और कार्यक्षमता पर विपरीत असर पड़ता है।
संस्था का कार्य प्रभावित होता है-इस तरह की अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं और बार-बार के पुलिसिया हस्तक्षेप से विद्यालय का दैनिक कामकाज और पठन-पाठन का माहौल बुरी तरह प्रभावित होता है।