नीमच (प्रवीण अहीर) । शहर के प्रमुख डिग्री कॉलेजों में पासआउट हो चुकीं छात्राएं अपनी मूल डिग्री (Degree Certificate) प्राप्त करने के लिए कालेजो में  चक्कर काटने को मजबूर हैं। आरोप है कि कॉलेज प्रशासन और काउंटर पर तैनात कर्मचारी छात्राओं को स्पष्ट जानकारी देने के बजाय टालमटोल कर रहे हैं, जिससे छात्राओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। छात्राओं की मुख्य समस्याएं-स्पष्ट जवाब न मिलना: घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी कर्मचारी यह नहीं बता पा रहे हैं कि डिग्री विश्वविद्यालय से बनकर आई है या नहीं। समय और पैसों की बर्बादी: दूर-दराज के इलाकों से आने वाली छात्राओं को केवल "कल आना" कहकर वापस भेज दिया जाता है। आगे की पढ़ाई व नौकरी पर असर: उच्च शिक्षा में दाखिले और नौकरी के इंटरव्यू के लिए मूल डिग्री की आवश्यकता होती है, जिसके न मिलने से छात्राओं का भविष्य अधर में लटका है।
छात्राओं का पक्ष-पीड़ित छात्राओं का कहना है कि उन्होंने महीनों पहले आवेदन फॉर्म जमा कर दिया था। इसके बावजूद जब भी वे काउंटर पर पूछने जाती हैं, तो कर्मचारी अभद्र व्यवहार करते हैं और ठीक से बात नहीं करते। एक छात्रा ने बताया, "हमें हर बार नया कारण बताकर टरका दिया जाता है। कोई यह बताने को तैयार नहीं है कि डिग्री कब कहां से मिलेगी।" प्रशासनिक ढिलाई पर सवाल-कॉलेज के प्रशासनिक कर्मचारियों के इस ढुलमुल रवैये से व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। छात्राओं ने मांग की है कि डिग्री वितरण के लिए एक पारदर्शी और डिजिटल प्रक्रिया लागू की जाए या फिर एक समर्पित हेल्पडेस्क बनाया जाए ताकि उन्हें बेवजह परेशान न होना पड़े।