नीमच। स्थानीय कृषि उपज मंडी में मंगलवार को ट्रॉली तुलाई की नई व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। मंडी प्रशासन द्वारा शुरू की गई व्यवस्था के विरोध में सैकड़ों हम्मालों और तुलावटी मजदूरों ने नीलामी के बीच ही काम बंद कर दिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से मंडी में अफरा-तफरी मच गई और तुलाई तथा खरीदी की प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो गई। मजदूरों का कहना था कि सीधे ट्रॉली में उपज की तुलाई को अनिवार्य किए जाने से उनका पारंपरिक काम खत्म होने की स्थिति बन जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से माल उतारने, जमीन पर तुलाई करने और उसे बोरे में भरने का काम हम्माल करते आ रहे हैं, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन कार्यों में भारी कटौती हो जाएगी। इससे 1099 लाइसेंसधारी हम्माल परिवारों की आजीविका पर सीधा संकट खड़ा हो सकता है। नारेबाजी करते हुए पहुंचे कलेक्टर कार्यालय ,काम बंद करने के बाद बड़ी संख्या में हम्माल मंडी परिसर से एकजुट होकर नारेबाजी करते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने एसडीएम पराग जैन को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याएं और आशंकाएं विस्तार से बताईं। प्रदर्शनकारी मजदूरों ने कहा कि वे किसानों के हितों या मंडी के आधुनिकीकरण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन ऐसी व्यवस्था स्वीकार नहीं करेंगे जिससे उनके रोजगार और परिवारों के भविष्य पर असर पड़े।
हम्माल संघ की प्रमुख मांगें
ज्ञापन में संघ ने प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं —
ट्रॉली में तुलाई की व्यवस्था अनिवार्य नहीं की जाए।
तुलाई का तरीका किसानों की इच्छा और विकल्प पर छोड़ा जाए।
यदि किसान जमीन पर तुलाई कराना चाहे तो उसे इसकी अनुमति मिले।
भविष्य में कोई भी नई व्यवस्था लागू करने से पहले हम्माल संघ और श्रमिक प्रतिनिधियों से चर्चा की जाए।
प्रभावित हम्मालों और तुलावटी मजदूरों के लिए रोजगार सुरक्षा नीति बनाई जाए।हम्मालों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए इलेक्ट्रॉनिक कांटों के लाइसेंस दिए जाएं।
उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए लोन और अन्य वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
एसडीएम ने दिया आश्वासन कलेक्टर कार्यालय में मजदूरों की बात सुनने के बाद एसडीएम पराग जैन ने उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन उनकी सभी जायज मांगों पर गंभीरता और सहानुभूति से विचार करेगा तथा किसी भी मजदूर के रोजगार को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासन की ओर से मिले आश्वासन के बाद हम्मालों ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा की। इसके बाद सभी मजदूर दोबारा मंडी पहुंचे और दोपहर बाद रुकी हुई नीलामी और तुलाई की प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकी।
समन्वय की कमी आई सामनेमंडी में हुए इस घटनाक्रम ने प्रशासन और श्रमिक संगठनों के बीच संवाद और समन्वय की कमी को उजागर कर दिया है। नई तकनीक और व्यवस्थाओं को लागू करने से पहले संबंधित हितधारकों से चर्चा नहीं होने पर भविष्य में भी ऐसे विवाद खड़े होने की आशंका बनी हुई है।