लनीमच कलेक्ट्रेट में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान एक किसान ने खुद पर डीजल उड़ेल लिया। मनासा तहसील के ग्राम कंजार्डा निवासी हीरालाल मालवीय नामक किसान ने सुनवाई न होने से परेशान होकर यह कदम उठाया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए किसान को हिरासत में ले लिया और डीजल की केन छीन ली, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। किसान हीरालाल मालवीय अपने गले में आवेदनों और अदालती फैसलों की माला पहनकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उनका आरोप था कि अदालत से जमीन का कब्जा जीतने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है और उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मध्य प्रदेश शासन की प्राथमिकता में शामिल 'जनसुनवाई' की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। जिला प्रशासन एक ओर 80 प्रतिशत से अधिक शिकायतों के निराकरण का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कलेक्ट्रेट परिसर में इस तरह की घटनाएं प्रशासनिक बेरुखी के खिलाफ बढ़ते आक्रोश को दर्शा रही हैं। हाल ही में जिला प्रशासन ने आंकड़े जारी कर बताया था कि एक वर्ष में प्राप्त 4,734 आवेदनों में से 3,793 (80.1%का सफल निपटारा किया जा चुका है। हालांकि, कलेक्ट्रेट में लगातार हो रहे ऐसे प्रदर्शन इन दावों पर सवाल खड़े करते हैं कि यदि इतनी समस्याओं का समाधान हो रहा है, तो किसान को आत्मदाह की नौबत तक क्यों आना पड़ रहा है। नीमच कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान पहले भी कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें जावद के आमली भाट के ग्रामीणों द्वारा पीएम आवास के लिए लोट यात्रा, 80 वर्षीय बुजुर्ग किसान मेहताब सिंह का खेत का रास्ता बंद होने पर दंडवत होना, और 'क्या जनसुनवाई नाम की है, शिकायत किस काम की?' की तख्ती लेकर पहुंचे पीड़ित शामिल हैं। इसके अलावा, केरोसिन/डीजल उड़ेलने और जहरीला पदार्थ गटकने जैसे आत्मघाती कदम भी पहले उठाए जा चुके हैं।