निम्बाहेड़ा/ "सीमेंट की तरह मजबूत" कहे जाने वाली निम्बाहेड़ा नगर परिषद आज "भ्रष्टाचार के खेल के कारण खोखली" नजर आ रही है।  गली की नाली साफ सफाई और सड़कों को लेकर करोड़ों के टेंडर  पर हर जगह खुली लूट और भारी भरकम  "कमीशनखोरी" की चर्चा आम है अब सवाल एक ही है कि नए बोर्ड के गठन के बाद क्या जनता को इस भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी या फिर सब कुछ ऐसा ही चलता रहेगा?विकास कार्यो के नाम पर  सड़क, नाली, लाइट के बडे़ बडे़ टेंड़र जारी होकर हकीकत धरातल पर नहीं बल्कि कागजों में काम नजर आया और पैसा किसकी पंहुचा यह जनता से छुपा नही है ठेकेदार हर ठेके में "ऊपर से नीचे तक सेटिंग" जमाकर जनता के टैक्स के पेसो का खुलेआम दोहन किया। 

जनता के हिस्से में आई तो सिर्फ परेशानी 
पिछले 5 साल का कांग्रेस बोर्ड हो या 3 साल की सरकार का कार्यकाल आम जनता मूलभूत सुविधाओं के अभाव में तरसती ही रही है। नागरिको का कहना है "बोर्ड बदले, चेहरे बदले, पर सिस्टम नहीं बदला।
नगर की  हर गली हर मोहल्ले की सड़को की बदहाली सबके सामने है सड़क में गड्डे हैं या गड्डों में सड़क है यह कहना जरा मुश्किल है। "सीमेंट नगरी की सड़कें सीमेंट से नहीं, भ्रष्टाचार से बनी हैं। 

साफ सफाई के नाम पर करोड़ो के टेंडर मनमाने तरीके से निकले लेकिन नतीजा क्या रहा सबके सामने है। गंदगी से भरे नाले नालियां जहां तहां लगे कचरे के ढेर, मच्छरों के ढेर बढती बीमारियां, टूटे फूटे पेशाबघर की परेशानियों को नगर महिलाओं बुजुर्गों और बाहर से आने वाले लोगो ने भुगता है । वह आज भी सबके लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। जनता आज तक यह नहीं समझ पाई कि किस मानसिकता से  अच्छी भली रोड तोड कर जनता के धन को बरबाद किया गया। जबकि नगर की कई कॉलोनियां बरसों से सड़को के लिए तरस रहीं है वहां के नागरिक नारकीय यातना भुगतने को मजबुर हैं। मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसती  जनता को अब जवाब चाहिए कि नया बोर्ड आएगा तो कुछ बदलाव होगा कि सब कुछ यही चलता रहेगा और जनता अच्छे दिन के चक्कर में यू हीं.......।