नीमच। मध्य प्रदेश के अफीम गढ़ कहे जाने वाले नीमच-मंदसौर में मादक पदार्थों की तस्करी के साथ-साथ अब एक घिनौना 'राजनीतिक खेल' भी सामने आया है। आपसी रंजिश भुनाने और एक रसूखदार छवि वाले निर्दोष व्यक्ति को सलाखों के पीछे धकेलने के लिए 'सफेदपोश' नेताजी ने अपनी पूरी ताकत, पैसा और पहुंच झोंक दी। लेकिन कहते हैं न—‘सांच को आंच कहां!’ नारकोटिक्स विंग की सतर्कता से नेताजी का फैलाया झूठा जाल तार-तार हो गया और उनका यह खतरनाक मंसूबा धरा का धरा रह गया।

1 किलो 300 ग्राम अफीम के साथ दो गिरफ्तार
मामला तब शुरू हुआ जब नारकोटिक्स विंग नीमच ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बाइक सवार दो आरोपियों को गिरफ्तार किया! 
 अनोप गुर्जर (पिता तेजराज गुर्जर, निवासी मेलकी)
 रामकरण (पिता पुखराज, निवासी मेलकी)
दोनों के कब्जे से 1 किलो 300 ग्राम अवैध अफीम बरामद की गई। नारकोटिक्स विंग ने दोनों के खिलाफ NDPS एक्ट की संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। असली खेल तो इस गिरफ्तारी के बाद शुरू हुआ!

'नेताजी' का साम-दाम-दंड-भेद: दिनभर मची रही अफ़रातफ़री:- 
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, गुर्जर समाज के ही एक तथाकथित नेताजी की किसी प्रसिद्ध व्यक्ति से पुरानी रंजिश चल रही थी। उस सम्मानित व्यक्ति की सामाजिक छवि को तार-तार करने के लिए नेताजी ने नारकोटिक्स मामले का इस्तेमाल करने की साजिश रची।

 पैसे और पहुंच का खुला इस्तेमाल: -
साजिशकर्ता नेताजी ने अधिकारियों पर दबाव बनाने और केस में उस निर्दोष व्यक्ति का नाम जुड़वाने के लिए साम, दाम, दंड, भेद—सब कुछ आजमा लिया।

 सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाज़ार गर्म:- शुक्रवार को दिनभर सोशल मीडिया पर प्रायोजित अफवाहें उड़वाई गईं ताकि जनमानस में उस व्यक्ति की छवि खराब की जा सके।

अधिकारियों ने भांप ली 'रंजिश की बू', फेल हुआ मास्टरप्लांट:- 
हालांकि, इस बार नेताजी का पाला स्मार्ट और मुस्तैद अधिकारियों से पड़ा था। नारकोटिक्स विंग के आला अधिकारियों को शुरुआत में ही इस बात का अंदेशा हो गया था कि पूरे मामले के पीछे राजनीतिक विद्वेष और आपसी दुश्मनी है।

अधिकारियों ने नेताजी की हर चाल पर पैनी नज़र रखी और राजनीतिक दबाव में आए बिना सिर्फ सबूतों के आधार पर कार्रवाई की। सफेदपोश दिनभर चक्कर काटता रह गया, लेकिन अधिकारियों ने झूठी प्राथमिकी दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया।

क्या रंजिश निकालने का जरिया बन रहा है NDPS?:-
नीमच और मंदसौर जिले में मादक पदार्थों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन इस घटना ने एक डरावना सच सामने ला खड़ा किया है। सवाल यह उठता है कि:- 

1. क्या अपनी आपसी दुश्मनी निकालने के लिए रसूखदार अब इतने खतरनाक हथकंडे अपनाएंगे?

2. क्या किसी बेगुनाह को झूठे अफीम केस में फंसाकर उसकी जिंदगी तबाह करने की इजाजत दी जा सकती है?

इस मामले का तो भंडाफोड़ हो गया लेकिन पुलिस और नारकोटिक्स विभाग के उच्च अधिकारियों को अब ऐसे मामलों में केवल जब्ती तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पीछे छिपे ऐसे 'मास्टरमाइंड' और रसूखदारों के आपसी विवादों की भी गहराई से पड़ताल करनी चाहिए ताकि कोई बेगुनाह किसी साजिश का शिकार न बने।