जावद। समाजसेवा की भावना को जीवन का हिस्सा बनाने वाले जावद निवासी सत्यनारायण राठी और उनकी पत्नी शांतिबाई ने मृत्यु के बाद देहदान करने की घोषणा कर अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। दोनों का देहदान सामाजिक संस्था भारत विकास परिषद शाखा जावद के माध्यम से किया जाएगा। दंपती ने कहा कि जीवन रहते तो सभी अपनी क्षमता के अनुसार समाज के लिए कुछ न कुछ करते हैं, लेकिन मृत्यु के बाद भी शरीर चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के अध्ययन और शोध के काम आए, इससे बेहतर सेवा और क्या हो सकती है।
83 वर्षीय सत्यनारायण राठी, पिता शंकरलाल राठी, मार्केटिंग सोसायटी में मैनेजर के पद पर करीब 40 वर्षों तक सेवाएं दे चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे और जावद रोटरी क्लब के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली। उनकी पत्नी शांतिबाई (77) ने भी उनके साथ देहदान का संकल्प लिया।
दंपती ने अपनी चारों बेटियों सूरज गगरानी (रतलाम), सरोज आगर (जोबट), संतोष बियानी (दाहोद) अंतिमबाला दरक (नीमच) की प्रेरणा से देहदान की घोषणा की। परिवार की सहमति और सहयोग से लिया गया यह निर्णय समाज में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला है। भारत विकास परिषद के रीजनल सचिव प्रदीप चौपड़ा व पूर्व अध्यक्ष निरंजन गोयल के सहयोग से देहदान को लेकर संकल्प पत्र भरा गया। देहदान की घोषणा के अवसर पर भारत विकास परिषद शाखा जावद के अध्यक्ष महेश सोनी, सचिव दीपेश जोशी, दिलीप राठी, मधुसूदन मुछाल, प्रहलाद सोनी सहित परिषद के सदस्य उपस्थित रहे। उपस्थित सदस्यों ने दंपती के इस निर्णय की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी पहल बताया।