रतनगढ़ में खाकी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल: पत्रकार सह बर्तन व्यवसायी पर जानलेवा हमले के बाद पुलिस का 'अजब खेल', फरियादी को ही बना दिया मुजरिम!
​घटना का केंद्र: वार्ड नंबर 08, रतनगढ़ (दुधतलाई जमीन विवाद)।
​पीड़ित (पत्रकार): अनिल सोडानी (बर्तन व्यवसायी एवं जिला प्रेस क्लब नीमच के सक्रिय सदस्य)।
​मुख्य आरोपी: राजेंद्र चारण, अरविंद चारण और उनके अन्य साथी गण।
​पुलिसिया यू-टर्न: पहले आरोपियों पर एफआईआर दर्ज, और फिर कथित दबाव में आकर रातों- रात न्याय मांगने वाले पत्रकार पर ही क्रॉस कायमी (फर्जी प्रकरण)लाद देना।
​क्या है पूरा मामला?
​रतनगढ़ के वार्ड नंबर 08 में जमीन के एक पुराने विवाद को लेकर खूनी संघर्ष और पुलिस की संदिग्ध कार्यप्रणाली ने सनसनी फैला दी है। पीड़ित अनिल सोडानी जो एक प्रतिष्ठित बर्तन व्यवसायी होने के साथ -साथ जिला प्रेस क्लब नीमच के सक्रिय सदस्य और पत्रकार भी हैं, के अनुसार वर्ष 2013 में भरतलाल पाटीदार ने शिवलाल गोयल से दुधतलाई स्थित 05 बीघा जमीन खरीदी थी।​शिवलाल गोयल के निधन के बाद उनकी सुपुत्री चारुल ने यह जमीन फरियादी की माताजी श्रीमती शांति देवी के नाम करा दी थी, जिसका मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद,आरोप है कि भरतलाल पाटीदार ने इसी विवादित जमीन को आगे आरोपी राजेंद्र चारण को बेच दिया, जिसके बल पर यह पूरा खूनी विवाद खड़ा किया गया।
​बालाजी मंदिर से लौट रहे पत्रकार पर जानलेवा हमला
​27 अगस्त की रात करीब 9:30 बजे जब पत्रकार अनिल सोडानी बालाजी मंदिर के दर्शन कर अपने घर लौट रहे थे, तभी घात लगाए बैठे राजेंद्र चारण,अरविंद चारण और उनके अन्य साथियों ने उन्हें मुकेश छीपा के मकान के पास घेर लिया।
​गाली-गलौज और बर्बरता: जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर आरोपियों ने अभद्रता की और विरोध जताने पर लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा।
​गंभीर चोटें: इस कायराना हमले में अनिल सोढानी के बाएं कान के पास, दाहिने हाथ की कलाई, बाजू और पेट पर गंभीर चोटें आईं।
​जान से मारने की खुली धमकी: मौके पर मौजूद साथियों (मुकेश छीपा, मंगल मीणा और गोपाल टेलर) ने बमुश्किल बीच-बचाव कर उनकी जान बचाई। जाते-जाते आरोपी खुलेआम धमकी दे गए कि "यदि दुधतलाई वाले खेत की बात दोबारा उठाई, तो जान से खत्म कर देंगे।"
​रतनगढ़ पुलिस का दोमुंहा रवैया: 'पत्रकार' फरियादी को ही बना डाला अपराधी!
​घटना के तुरंत बाद, 27 अगस्त 2026 की रात रतनगढ़ थाने में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 296(b), 115(2), 351(3) और 3(5) के तहत सब इंस्पेक्टर के.एल. सोलंकी द्वारा एफआईआर (क्र.0171/2026) दर्ज की गई।
​खाकी की निष्पक्षता पर बड़ा दाग: इसके ठीक अगले ही दिन राजनीतिक व अन्य संदिग्ध दबाव के चलते सब इंस्पेक्टर के.एल. सोलंकी द्वारा ही न्याय की गुहार लगाने वाले पत्रकार पर फर्जी क्रॉस केस दर्ज कर दिया गया।
​साक्ष्यों से खुला खिलवाड़:
​'डायल 112' का वीडियो: जिस वक्त घटना घटी, मौके पर पहुंची 'डायल 112' के वाहन के ड्राइवर के मोबाइल में मारपीट का साफ वीडियो रिकॉर्ड है।
​गायब सीसीटीवी फुटेज: घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी फुटेज का डीवीआर ठीक दो दिन पूर्व 'खराब होना' बताकर अहम सबूतों को मिटाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।
​मामले को कमजोर करने की साजिश: फरियादी ने 7 से 8 हमलावरों के नाम और चेहरे पहचानने की बात कही थी, लेकिन पुलिस ने एफआईआर में सिर्फ दो नाम लिखकर बाकी को 'अन्य' दर्शा दिया, ताकि अपराधियों को कानूनी सुरक्षा कवच मिल सके।
​सर्व समाज और पत्रकारों में भारी आक्रोश, न्याय की हुंकार
​घटना के बाद नगर के गणमान्य नागरिकों, सर्व समाज और पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल रतनगढ़ थाना प्रभारी से मिला था। तब थाना प्रभारी ने सख्त कार्रवाई करते हुए 'बलवा' की धाराएं जोड़ने का पूरा आश्वासन दिया था। मगर, शाम ढलते ही पासा पलट गया और पुलिस ने दबाव के आगे घुटने टेकते हुए पीड़ित पत्रकार पर ही फर्जी क्रॉस कायमी ठोक दी।
​पत्रकारिता जगत और नागरिकों की दोटूक मांग:
​पूरे मामले की निष्पक्ष जांच साइबर सेल से कराई जाए।
​घटनास्थल के आसपास के दुकानदारों की गवाही, 'डायल 112' के वीडियो फुटेज और आरोपियों के मोबाइल लोकेशन की उच्चस्तरीय जांच हो।
​पत्रकार पर की गई फर्जी क्रॉस कायमी को तत्काल प्रभाव से रद्द कर असली और खूंखार दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
​क्या लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला करने वाले रसूखदारों को पुलिस बचा लेगी या निष्पक्ष जांच से सच सामने आएगा?
​अब देखना यह है कि नीमच जिले के निष्पक्ष, ईमानदार एवं स्वच्छ छवि के पुलिस अधीक्षक महोदय, डीआईजी महोदय तथा प्रशासनिक अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम में छुटभैया नेताओं और भूमाफिया रसूखदारों के दबाव में खाकी की कार्यप्रणाली को कलंकित करने वाले दोषी कर्मचारियों और अपराधियों के खिलाफ क्या सख्त कदम उठाते हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के सुशासन की स्वच्छ छवि को धूमिल करने वाले इन तत्वों पर कार्रवाई कर पीड़ित बर्तन व्यवसायी व स्वतंत्र पत्रकार को न्याय का इंतजार है।