नीमच। आसमान में बादलों की आवाजाही तो बनी हुई है,लेकिन खेतों को जिस झमाझम बारिश का इंतजार है,वह अब तक पूरी नहीं हो सकी है। मानसून की इस बेरुखी ने नीमच जिले के किसानों की चिंताओं को चरम पर पहुँचा दिया है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से जिले की मुख्य खरीफ फसलें—सोयाबीन और मूंगफली बुरी तरह प्रभावित होने लगी हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जिले में अब तक हुई बारिश पिछले वर्ष की तुलना में करीब आधी रह गई है। ऐसे में किसान अब आगामी दिनों में होने वाली बारिश से ही उम्मीद लगाए बैठे हैं।
7 दिन और नहीं बरसे बादल, तो चौपट हो जाएगी फसल,किसानों का कहना है कि यदि आगामी 2 दिनों में अच्छी बारिश हो जाती है, तो करीब 50 फीसदी फसल को बचाया जा सकता है। लेकिन यदि आगामी 7 दिनों तक बारिश नहीं हुई,तो फसल उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होकर महज 20 प्रतिशत तक ही सिमट जाएगा। पानी की इस भारी कमी के चलते फसलों में दाना बनने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े आर्थिक संकट की स्थिति बन सकती है।
काला बाजारी की मार, महंगी दवाइयां भी बेअसर*:मामले को लेकर जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष गोविंद सिंह सांडा ने किसानों की गंभीर व्यथा उठाते हुए कहा कि नीमच जिले के किसानों को शुरुआत से ही लूटा जा रहा है। पहले किसानों को बाजार से बेहद महंगे दामों पर बीज खरीदने पड़े। इसके बाद बोवनी के समय समितियों से खाद गायब रही, जिसके कारण किसानों ने मजबूरी में कालाबाजारी से ऊंचे दामों पर खाद खरीदा।गोविंद सिंह सांडा ने बताया कि संकट यहीं खत्म नहीं हुआ। इस बार बारिश की कमी के कारण प्रत्येक किसान के खेत में मक्का की फसल में 'इल्टे' (इल्ली) की बीमारी का भारी प्रकोप देखा जा रहा है।
 किसानों ने कर्ज लेकर खेतों में महंगी-महंगी कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव किया है, लेकिन बारिश नहीं होने से ये दवाइयां भी बेअसर साबित हो रही हैं।
*जंगली सूअरों के साथ अब बंदरों का आतंक*
 कृषि विभाग गायब
अन्नदाता इस समय चौतरफा मार झेल रहा है। कम पानी के कारण खेतों में कीट व्याधि तो बढ़ ही रही है, साथ ही जंगली सूअरों के अलावा अब बंदरों के झुंड भी खेतों को निशाना बना रहे हैं। बंदर खड़ी फसलों को उजाड़ रहे हैं जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। सांडा ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि इस महासंकट के दौर में शासन का अभिन्न अंग कहलाने वाला कृषि विभाग पूरे क्षेत्र से नदारद (गायब) है। किसानों का मार्गदर्शन करने या राहत पहुँचाने में विभाग की भूमिका पूरी तरह नगण्य साबित हो रही है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है।
समय रहते सुध ले सरकार, वरना सदमे में आ जाएगा किसान,
कांग्रेस नेता गोविंद सिंह सांडा ने शासन-प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को समय रहते अन्नदाता की सुध लेनी चाहिए। यदि समय पर उचित कदम नहीं उठाए गए, तो अपनी आंखों के सामने सालभर की मेहनत को बर्बाद होते देख क्षेत्र का किसान भारी मानसिक और आर्थिक सदमे में पहुँच सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। उन्होंने सरकार से नीमच को तुरंत सूखा घोषित करने और विशेष गिरदावरी (फसल सर्वे) कराने की मांग उठाई है