नीमच। कृषि उपज मंडी समिति, नीमच में चल रही प्रशासनिक अनियमितताओं और अधिकारियों की मनमानी अब खुलकर सामने आ गई है। मंडी के भीतर नियमों को दरकिनार कर जिस तरह से एक अनधिकृत व्यक्ति के माध्यम से संवेदनशील नीलामी की प्रक्रिया संचालित करवाई जा रही है, उसने पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस पूरे प्रकरण के प्रामाणिक दस्तावेज भी सामने आ चुके हैं, जिनसे यह स्पष्ट हो गया है कि मंडी परिसर में नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है और जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में मूक दर्शक बने हुए हैं।
*आखिर किन नियमों से चल रही है नीमच मंडी?*
मंडी प्रांगण में किसानों की उपज की नीलामी एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसका सीधा असर किसानों की आय और बाजार की पारदर्शिता पर पड़ता है। लेकिन नीमच मंडी में यह कार्य एक ऐसे व्यक्ति द्वारा करवाया जा रहा है, जिसके पास किसी भी प्रकार की शासकीय अनुमति या नियुक्ति का कोई वैध आदेश नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किस नियम के तहत एक गैर-जिम्मेदार और अनधिकृत व्यक्ति को नीलामी का अधिकार दिया गया है? एक अनधिकृत व्यक्ति द्वारा बोली लगवाना सीधे तौर पर किसानों के साथ धोखा और मंडी अधिनियमों का खुला उल्लंघन है।
*कार्रवाई के बजाय लीपापोती का खेल*
मंडी अधिकारियों का इस पूरे प्रकरण में रवैया संदेह के घेरे में है। शिकायत होने पर निष्पक्ष जांच करने के बजाय, संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासनिक व्यवस्थाओं में शिकायत दर्ज होने के बावजूद, कोई ठोस कदम उठाने के बजाय लीपापोती की जा रही है। बिना वैध आदेश के काम करने की इस गंभीर शिकायत को गंभीरता से लेने के बजाय, अधिकारियों का यह रवैया साबित करता है कि मंडी प्रशासन खुद इस अनियमितता को संरक्षण दे रहा है। ऐसा प्रतीत होता है मानो मंडी किसी सरकारी नियम से नहीं, बल्कि निजी व्यवस्थाओं के तहत संचालित हो रही हो।
*प्रामाणिक दस्तावेज आए सामने, उठे गंभीर सवाल*
मंडी अधिकारियों को शायद यह मुगालता था कि वे इस मामले को आसानी से दबा देंगे। लेकिन अब इस मामले को रफा-दफा करने और अनियमितताओं से जुड़े प्रामाणिक दस्तावेज सार्वजनिक हो चुके हैं। इन दस्तावेजों ने उस व्यवस्था का पर्दाफाश कर दिया है, जिसमें नियमों को ताक पर रखकर काम किया जा रहा था। अब यह तय माना जा रहा है कि इस स्तर पर संस्थागत अनियमितताओं को बढ़ावा देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल उठना लाजिमी है।
*उज्जैन संभाग से लेकर भोपाल तक गूंजेगी आवाज*
नीमच स्तर पर बैठे अधिकारियों की इस कारगुजारी को अब स्थानीय स्तर पर दबने नहीं दिया जाएगा। मामले के पुख्ता प्रमाणों के साथ अब यह शिकायत संभाग स्तर और राज्य स्तर के उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई जा रही है। भोपाल तक यह सवाल गूंजेगा कि नीमच मंडी में आखिर यह कौन सा 'सिंडिकेट' काम कर रहा है, जो सरकारी नियमों को दरकिनार कर अनधिकृत लोगों को उपकृत कर रहा है और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का मखौल उड़ा रहा है।
*प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग*
दस्तावेज सामने आने के बाद अब जिला प्रशासन की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करे। अनधिकृत रूप से नीलामी कर रहे व्यक्ति को तुरंत मंडी प्रांगण से बाहर किया जाना चाहिए और मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जांच होनी चाहिए, और जल्द ही दोषियों पर कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाना चाहिए।