नीमच। शहर के एकमात्र खुले और ऐतिहासिक खेल मैदान को बचाने की लड़ाई लगातार और अधिक मुखर होती जा रही है। 'मैदान बचाओ समिति' के आंदोलन के 15वें दिन शनिवार को धरना स्थल पर एक विशेष 'सद्बुद्धि यज्ञ' का आयोजन किया गया। समिति ने इस अनूठे आयोजन के माध्यम से शासन, प्रशासन और जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों तक एक कड़ा और स्पष्ट संदेश पहुँचाने का प्रयास किया। समिति का कहना है कि लगातार चल रहे आंदोलन के बावजूद जिम्मेदारों द्वारा जनभावनाओं और शहरवासियों की इस अति-महत्वपूर्ण मांग की गंभीरता को नहीं समझा जा रहा है। जिस मैदान को बचाने के लिए खिलाड़ी, युवा और आमजन लगातार आवाज़ उठा रहे हैं, उस मुद्दे पर अब तक अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई न देने से आंदोलनकारियों में भारी नाराजगी है।
जनता ने चुना अधिकारों की रक्षा के लिए, फिर आवाज़ क्यों अनसुनी? सद्बुद्धि यज्ञ के दौरान आंदोलनकारियों ने तीखा सवाल उठाया कि शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिक जिम्मेदारी जनता की भावनाओं और उनके हितों की रक्षा करना है। लेकिन जब शहर के खिलाड़ियों और नागरिकों की आवाज़ लगातार उठने के बावजूद कोई ठोस पहल दिखाई नहीं देती, तो आखिर जनता अपनी बात किसके सामने रखे? इसी पीड़ा और आक्रोश के बीच 'मैदान बचाओ समिति' ने विधि-विधान से यज्ञ में आहुतियाँ देकर ईश्वर से प्रार्थना की कि जिम्मेदारों को जनभावनाओं को समझने और शहर के खुले मैदान को सुरक्षित घोषित करने के लिए सकारात्मक निर्णय लेने की सद्बुद्धि प्राप्त हो।
खिलाड़ी भी उतरे, आमजन भी जुड़े—मैदान बचाने की लड़ाई हुई और मजबूत
यज्ञ में स्थानीय खिलाड़ियों के साथ बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक भी मौजूद रहे। उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि यह मैदान केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के भविष्य, बच्चों की खेल गतिविधियों, बुजुर्गों की सेहत और शहर की पहचान से जुड़ा सवाल है।
आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि मैदान बचाने की यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि पूरे नीमच शहर के अधिकार की लड़ाई है। जब तक मैदान को लेकर जनभावनाओं के अनुरूप निर्णय नहीं होता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
इनकी रही गरिमामयी मौजूदगी (कोई नाम न छूटे)
आयोजित सद्बुद्धि यज्ञ में शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों, खिलाड़ियों एवं आंदोलनकारियों ने अपनी आहुति दी। इस दौरान कीर्ति पंचोली, नवीन अग्रवाल, राकेश शर्मा, बालकृष्ण वर्मा, कपिल सिंह चौहान, श्याम गुर्जर, गजेंद्र सिंह चौहान, बालकृष्ण मिश्रा, सोनू शर्मा, मोहित रामरख्यानी, विमल शर्मा, मनीष वर्मा, राजू बैरागी, किरण परमार, अक्षय राठौर, मनोज जैन, लोकेश, मोहसीन खान, एवं जेहरान सहित कई अन्य खिलाड़ी व शहरवासी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
15 दिनों का संदेश साफ—मैदान बचाने का यह संघर्ष अब नहीं रुकेगा!
आंदोलन के 15वें दिन हुए इस सद्बुद्धि यज्ञ ने साफ कर दिया है कि 'मैदान बचाओ समिति' अब इस मुद्दे को केवल सामान्य धरने तक सीमित रखने के मूड में नहीं है। आंदोलनकारियों का कहना है कि शहर की जनभावनाओं की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और मैदान बचाने की यह लड़ाई पूर्ण मजबूती के साथ आगे भी जारी रहेगी।