नीमच। "जिन्होंने देश की सीमाओं पर अपनी जवानी खपा दी और गोलियों के सामने सीना तानकर खड़े रहे, आज वे ही सेवानिवृत्त बुजुर्ग जवान और वीर नारियां बुढ़ापे के इस पड़ाव में एक अदद आशियाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।" यह दर्द और आक्रोश सोमवार को नीमच नगरपालिका के विशेष सम्मेलन के दौरान उस वक्त फूट पड़ा, जब सीआरपीएफ (CRPF) के पेंशनर संघ ने अपनी 19 साल पुरानी आवासीय भूखंड की मांग को लेकर नपा परिसर को नारों से गुंजा दिया। वर्ष 2007 से लगातार शासन-प्रशासन के सामने गुहार लगा रहे इन पूर्व सैनिकों के सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका है
सीमित पेंशन और भारी किराया: कैसे कटे बुढ़ापा?. पेंशनर संघ के नेतृत्वकर्ता परमजीत सिंह फौजी ने बेहद भावुक और कड़े लहजे में कहा कि देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों की विधवाएं (वीर नारियां) और कई बुजुर्ग पेंशनर आज भी नीमच में किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। इस कमरतोड़ महंगाई के दौर में मिलने वाली सीमित पेंशन का एक बड़ा हिस्सा मकान मालिक की जेब में चला जाता है। ऐसे में बुजुर्गों के सामने गुजर-बसर और इलाज का संकट खड़ा हो गया है। संघ ने दो टूक मांग रखी है कि या तो पेंशनरों के लिए अलग से एक विशेष सैनिक आवासीय कॉलोनी विकसित की जाए, या फिर नगरपालिका की आगामी आवासीय योजनाओं में 50 प्रतिशत भूखंड हमारे लिए आरक्षित किए जाएं।
कलेक्टर से लेकर दिल्ली दरबार तक सिर्फ मिले आश्वासन,आंदोलनकारियों ने प्रशासनिक उदासीनता पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मांग को लेकर पिछले दो दशकों में जिला कलेक्टर से लेकर, सीआरपीएफ के उच्च अधिकारियों और भोपाल-दिल्ली की सरकारों तक अनगिनत आवेदन भेजे गए। लेकिन नतीजा हमेशा 'ढाक के तीन पात' ही रहा। जवानों का आरोप है कि रसूखदारों, भूमाफियाओं और अन्य व्यावसायिक निजी प्रोजेक्ट्स के लिए प्रशासन के पास जमीनों का अंबार है, लेकिन देश के असली रक्षकों को सिर्फ कोरे आश्वासन और कागजी दिलासा दिया जा रहा है
अफसरशाही पर भड़के जवान सीएमओ से हुई तीखी बहसप्रदर्शन के दौरान उस समय स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई जब अपनी जायज मांग रख रहे पेंशनरों और मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) दुर्गा बामनिया के बीच तीखी नोकझोंक और बहस हो गई। अफसर शाही के इस रवैये से नाराज पूर्व सैनिक सीधे नगरपालिका अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा के कक्ष में पहुंचे और घेराव करते हुए अपनी पीड़ा सुनाई। नपाध्यक्ष ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे परिषद के सामने रखने और सकारात्मक समाधान निकालने का भरोसा दिया है।
अब आर-पार की जंग: सड़क पर उतरने की दी चेतावनी
परमजीत सिंह फौजी ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो जवान सरहद पर कभी नहीं झुके, वे आज अपने हक के एक छोटे से जमीन के टुकड़े के लिए नगरपालिका के सामने खड़े होने को मजबूर हैं। सोमवार का यह प्रदर्शन तो सिर्फ एक चेतावनी है। यदि समय रहते प्रशासन ने हमारी सुध नहीं ली और ठोस आवंटन की प्रक्रिया शुरू नहीं की, तो पूरा पेंशनर संघ सड़कों पर उतरकर ऐसा चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन-प्रशासन की होगी।