जावद। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा अफीम उत्पादक किसानों के लिए आयोजित प्रशिक्षण शिविर का स्वागत करते हुए प्रकाश रांका, पूर्व जिला उपाध्यक्ष कांग्रेस पार्टी, नीमच एवं जावद विधानसभा क्षेत्र-230 ने कहा कि किसानों को आधुनिक तकनीक, संतुलित खाद, सिंचाई, रोग नियंत्रण और गुणवत्ता सुधार की जानकारी देना निश्चित रूप से अच्छी पहल है। रांका ने कहा कि मालवा का किसान मेहनती है और पीढ़ियों से अफीम की खेती का अनुभव रखता है। यदि इस अनुभव के साथ वैज्ञानिक मार्गदर्शन मिले तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो सकते हैं। लेकिन केवल शिविर आयोजित कर देना पर्याप्त नहीं है। किसानों को खेत पर जाकर सलाह, समय पर तकनीकी सहायता और पारदर्शी मार्फिन जांच भी मिलनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मौसम, बीमारी या प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण मार्फिन प्रभावित होती है तो क्या किसान को उसका उचित अवसर और निष्पक्ष मूल्यांकन मिलेगा? सरकार को ऐसी वास्तविक परिस्थितियों के लिए स्पष्ट व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि वर्षों से खेती कर रहे किसानों का पट्टा केवल तकनीकी परिस्थिति के कारण संकट में न आए।
रांका के प्रमुख सुझाव—
1.प्रत्येक अफीम उत्पादक क्षेत्र में नियमित वैज्ञानिक प्रशिक्षण हो।
2. किसानों को खेत स्तर पर विशेषज्ञों की सलाह उपलब्ध कराई जाए।
3.मार्फिन जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और भरोसेमंद हो।
4.प्राकृतिक कारणों से गुणवत्ता प्रभावित होने पर किसानों की सुनवाई हो।
5.उत्कृष्ट गुणवत्ता देने वाले किसानों को प्रोत्साहन मिले।
6.किसानों की शिकायतों के लिए त्वरित समाधान व्यवस्था बनाई जाए। रांका ने कहा कि किसान देश के लिए जीवनरक्षक दवाओं का महत्वपूर्ण कच्चा माल उपलब्ध कराता है। इसलिए सरकार का लक्ष्य केवल मानक पूरा करवाना नहीं, बल्कि किसान को सुरक्षित, वैज्ञानिक और सम्मानजनक तरीके से उत्पादन करने में सहयोग देना होना चाहिए।