नीमच । जैन तीर्थंकर एवं शालीभद्र जी के जीवन चरित्र से हमें समझना चाहिए उनके जीवन में विभिन्न प्रत्येक सुख सुविधा थी लेकिन उन्होंने आत्मा की जागृति के लिए संयम का मार्ग चुना उन्होंने शरीर के सुख नहीं आत्मा के कल्याण का चिंतन किया जीवन में हम भी शारीरिक सुख को महत्व नहीं देकर अपने आत्म कल्याण की चिंता करें तभी हमें मुक्ति का मार्ग मिल सकता है।। यह बात साध्वी अमी पूर्णा श्री जी महाराज साहब की सुशिष्या प्रवचन प्रभाविका साध्वी अमी दर्शा श्री जी महाराज साहब ने कही।वे श्री भीड़ भंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के तत्वाधान में सुबह 9बजे मिडिल स्कूल मैदान के समीप जैन भवन सभागार में आयोजित विशेष पर्युषण प्रवचन श्रृंखला में उपस्थित समाज जनों को कल्पसूत्र विषय पर संबोधित करते हुए बोल रही थी। उन्होंने कहा कि जैन धर्म हमें सुविधा भोगी बनना नहीं बल्कि आत्म जाग्रती के लिए प्रेरित होने की प्रेरणा देता है। हम विचार करें कि क्या हम थोड़े से दुःख या वेदना में विचलित नहीं होते हैं जीवन में जब भी वेदना दुःख आए घबराएं नहीं अपने आत्म जागृति के लिए प्रयत्नशील रहे ।हमारा मन चंचल है उसे नियंत्रित करने का प्रयत्न करें। यदि हम किसी को दुःख देंगे तो अंत में हमें भी दुःखी होना ही पड़ेगा। जीव दया का पालन करते हैं तो हमारा पुण्य कर्म बढ़ता है। पुण्य कर्म साथ रहता है तो सद्गति होती है और पुण्य कर्म कम होता है तो दुर्गति होती है। यह संसार स्वार्थी है संकट आने पर कोई भी साथ नहीं देता है।
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तपस्वियों की अनुमोदना..इस अवसर पर सभी समाज जनों ने तपस्वियों के
उपवास की तपस्या पुर्ण होने के लिए सामूहिक रूप से अनुमोदना कर हर्ष हर्ष जय जय जय घोष लगा कर की गई। इस अवसर पर विभिन्न समाज जनों ने एकासना बियासना, तैला,उपवास की तपस्या के लिए पंचखाण मांगलिक श्रवण कर संकल्प भी लिया। इस अवसर पर भीड़ भंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी सदस्य ,व ट्रस्ट अध्यक्ष अनिल नागौरी सहित बड़ी संख्या में समाज जन उपस्थित थे। धर्म सभा के संचालन मनीष कोठारी ने किया।
महावीर जन्म वाचन आज, जैन भवन में सुबह 10:30 बजे महावीर जन्म का वाचन होगा। पुस्तक बाजार भीड़ भंजन पार्श्वनाथ मंदिर एवं जिन कुशल दादावाड़ी ध्वजा सहित विभिन्न धार्मिक चढ़ावे की बोलियां लगाई जाएगी।