नीमच, 11 सितंबर। जिले में नियमों को ताक पर रखकर संचालित पैथोलॉजी लैब और दूर बैठे पैथोलॉजिस्ट के नाम पर जांच रिपोर्ट जारी किए जाने के मामलों में स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की है। विभागीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तीन पैथोलॉजी लैब के पंजीयन निरस्त कर दिए गए हैं। कार्रवाई के बाद जिले की अन्य पैथोलॉजी लैब की कार्यप्रणाली और पंजीकृत पैथोलॉजिस्ट की वास्तविक उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय की जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तीन लैब के पंजीयन निरस्त किए गए। इनमें सुरेश कुमार पैथोलॉजी लैब, मनासा, पवन पाटीदार पैथोलॉजी लैब, मनासा तथा नीमच के एक अन्य सेंटर का उल्लेख है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, उज्जैन संभाग के निर्देश पर गठित जांच समिति ने मौके पर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
दूर बैठे पैथोलॉजिस्ट के नाम पर चल रही थी व्यवस्था
मामला तब सामने आया जब पैथोलॉजिस्ट की वास्तविक उपस्थिति, जांच प्रक्रिया और रिपोर्ट प्रमाणित करने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ लैब में तकनीशियनों द्वारा जांच व्यवस्था संभालने तथा पैथोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति के बावजूद रिपोर्ट जारी किए जाने को लेकर गंभीर आपत्तियां थीं।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन मामलों में तत्काल प्रभाव से पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई की गई है। वहीं एक अन्य पैथोलॉजिस्ट से संबंधित प्रकरण को उच्च स्तरीय जांच के लिए क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, उज्जैन संभाग को भेजा गया है।
डिजिटल हस्ताक्षर से रिपोर्ट जारी करने पर भी सवाल
जांच के दौरान पैथोलॉजिस्ट की मौके पर उपस्थिति और उनके नाम से जारी होने वाली जांच रिपोर्ट की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे। विशेष रूप से डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से रिपोर्ट जारी किए जाने के मामले को गंभीरता से देखा गया है। इससे मरीजों की जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता और प्रमाणिकता को लेकर चिंता सामने आई।
अब अन्य लैब की भी जांच की जरूरत
तीन लैब पर हुई कार्रवाई के बाद जिले की अन्य पैथोलॉजी लैब की कार्यप्रणाली पर भी नजर रखने की जरूरत महसूस की जा रही है। खासकर यह जांच जरूरी है कि पंजीकृत पैथोलॉजिस्ट वास्तव में लैब में उपस्थित रहते हैं या नहीं, जांच रिपोर्ट किस स्तर पर प्रमाणित होती है और मरीजों को जारी की जा रही रिपोर्ट निर्धारित नियमों के अनुरूप है या नहीं। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से यह संदेश जरूर गया है कि पैथोलॉजी जांच जैसे संवेदनशील कार्य में नियमों की अनदेखी और कागजों पर पैथोलॉजिस्ट की मौजूदगी स्वीकार नहीं की जाएगी।