नीमच मेडिकल कॉलेज की स्थापना में करोड़ों रुपये खर्च हुए और नीमच नगरपालिका ने लगभग ₹200 करोड़ की जमीन उपलब्ध कराई। आज इसी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय को PPP मोड में देने की तैयारी जनता के हितों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
जावद विधानसभा की जनता का क्या होगा? गरीब परिवारों, किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों को सरकारी दरों पर बेहतर इलाज मिलना चाहिए, लेकिन निजी भागीदारी के बाद इलाज महंगा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। जावद क्षेत्र के मरीजों को नीमच पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में सरकारी मेडिकल कॉलेज का निजीकरण आम जनता के हितों को प्रभावित कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदीजी के सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के संकल्पों के बीच मध्य प्रदेश सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए मेडिकल कॉलेज को PPP मोड में देने की आवश्यकता क्यों पड़ी?सरकार नीमच मेडिकल कॉलेज को सरकारी स्तर पर संचालित करे और जावद सहित पूरे जिले की जनता के सुलभ एवं सस्ते इलाज का अधिकार सुरक्षित रखे।