नीमच/नयागांव। सरकारी स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी शिक्षा व्यवस्था की है, लेकिन जावद क्षेत्र के नयागांव में सामने आए एक वीडियो ने इसी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासकीय माध्यमिक विद्यालय नयागांव में विद्यार्थियों से स्कूल परिसर में उगी गाजर घास उखड़वाए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो सामने आने के बाद अब सवाल यह है कि स्कूल परिसर की सफाई के लिए विद्यार्थियों को ही क्यों लगाया गया और समय रहते परिसर की सफाई क्यों नहीं कराई गई?
जानकारी के अनुसार स्कूल परिसर में काफी मात्रा में गाजर घास उग आई थी। इसे हटाने के दौरान विद्यार्थियों के हाथों से गाजर घास उखड़वाए जाने का वीडियो सामने आया। मामले को लेकर अभिभावकों और स्थानीय लोगों में भी चर्चा है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों से पढ़ाई के अलावा इस तरह का काम कराया जाना उचित है या नहीं, इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट करनी चाहिए।
223 विद्यार्थियों की सुरक्षा का सवाल
विद्यालय में करीब 223 विद्यार्थी अध्ययनरत बताए जा रहे हैं। इतने विद्यार्थियों वाले स्कूल परिसर में नियमित सफाई व्यवस्था होना आवश्यक है। यदि परिसर में लंबे समय से गाजर घास उगी हुई थी तो उसे समय रहते हटाने के लिए जिम्मेदार स्तर से कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि सफाई के लिए बाहरी एजेंसी अथवा नगर परिषद को जिम्मेदारी दी जानी थी तो उसके लिए समय पर समन्वय क्यों नहीं हुआ? ये सवाल अब मामले के केंद्र में हैं। गाजर घास के संपर्क से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने की आशंका को देखते हुए विद्यार्थियों से इसे हटवाए जाने के निर्णय पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इस संबंध में किसी विद्यार्थी को स्वास्थ्य नुकसान हुआ है, ऐसी कोई पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है।
स्कूल प्रबंधन का दावा- पत्र भेजा था
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका का कहना है कि स्कूल परिसर की सफाई के लिए नगर परिषद नयागांव को पत्र भेजा गया था। उनके अनुसार परिषद की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण विद्यार्थियों की मदद से परिसर की सफाई कराई गई।
नगर परिषद ने दावे से किया इनकार
दूसरी ओर नगर परिषद नयागांव के जिम्मेदारों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन की ओर से सफाई के संबंध में कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ। परिषद के अनुसार यदि लिखित आवेदन प्राप्त होता तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जा सकती थी।
यानी मामले में स्कूल प्रबंधन और नगर परिषद के दावों में स्पष्ट अंतर सामने आ रहा है। अब यह जांच का विषय है कि स्कूल की ओर से पत्र वास्तव में भेजा गया था या नहीं। यदि पत्र भेजा गया था तो उसकी प्राप्ति कहां हुई, किस अधिकारी के पास पहुंचा और उस पर क्या कार्रवाई की गई? वहीं यदि पत्र प्राप्त ही नहीं हुआ तो स्कूल प्रबंधन ने किस माध्यम से और कब पत्र भेजा था, इसका रिकॉर्ड भी सामने आना चाहिए।
जांच में सामने आएगी जिम्मेदारी
वीडियो वायरल होने के बाद मामले में केवल विद्यार्थियों से सफाई कराने के निर्णय पर ही नहीं, बल्कि स्कूल परिसर की नियमित सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। संबंधित शिक्षा अधिकारियों द्वारा स्कूल का निरीक्षण कर स्थिति की वास्तविकता जानना और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच करना महत्वपूर्ण होगा।
मामले में यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि विद्यार्थियों से सफाई किसके निर्देश पर कराई गई, कितने विद्यार्थी इसमें शामिल थे, क्या उन्हें किसी प्रकार की सुरक्षा सामग्री उपलब्ध कराई गई थी और परिसर की नियमित सफाई के लिए विद्यालय स्तर पर क्या व्यवस्था निर्धारित है।
फिलहाल वायरल वीडियो ने स्कूल की सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब स्कूल प्रबंधन के पत्र और नगर परिषद के रिकॉर्ड की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सफाई के लिए किस स्तर पर पहल की गई थी और विद्यार्थियों से गाजर घास हटवाने की नौबत क्यों आई।