नीमच। शहर के ऐतिहासिक खेल मैदान को बचाने के लिए 28 दिनों से जारी शांतिपूर्ण आंदोलन में सोमवार सुबह ऐसा मोड़ आया, जिसने आंदोलनकारियों के साथ-साथ शहर में भी सवाल खड़े कर दिए। जिस टेंट के नीचे नागरिक और खिलाड़ी पिछले 28 दिनों से धूप, धूल और हवाओं के बीच बैठकर अपने हक की आवाज उठा रहे थे, वह सोमवार सुबह अचानक गायब मिला। रविवार रात तक टेंट मौके पर था, लेकिन सुबह वहां सिर्फ खाली जमीन दिखाई दी।
आंदोलनकारियों के मुताबिक, रात के अंधेरे में टेंट हटा दिया गया। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि प्रशासन की ओर से देर रात कार्रवाई कर टेंट को अपने कब्जे में लिया गया। हालांकि, टेंट हटाने को लेकर प्रशासन की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सवाल सीधा है- दिन में बात क्यों नहीं, रात में टेंट क्यों हटाया?
मैदान बचाओ समिति के सदस्यों का कहना है कि यदि टेंट लगाने को लेकर प्रशासन को कोई आपत्ति थी या कोई नियम आड़े आ रहा था, तो आंदोलनकारियों को दिन के उजाले में बुलाकर बात की जा सकती थी। नोटिस दिया जा सकता था, संवाद किया जा सकता था और कोई रास्ता निकाला जा सकता था। लेकिन रात में टेंट हटाए जाने की कार्रवाई ने आंदोलनकारियों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
28 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे नागरिकों का कहना है कि उनका संघर्ष किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि शहर की आने वाली पीढ़ी के लिए खेल मैदान बचाने की मांग को लेकर है। ऐसे में आंदोलन स्थल से उनका एकमात्र सहारा भी हटा दिया जाना उन्हें प्रशासनिक कार्रवाई से ज्यादा एकतरफा रवैये जैसा महसूस हो रहा है।
एक दिन पहले मुख्यमंत्री तक पहुंचाने गए थे आवाज, अगले दिन टेंट भी नहीं मिला
मामले को लेकर एक और बात आंदोलनकारियों को ज्यादा खल रही है। समिति के सदस्य एक दिन पहले ही अपनी मांग मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के लिए कार्यक्रम स्थल पहुंचे थे। समिति का आरोप है कि उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया और कार्यक्रम स्थल से बाहर कर दिया गया।
आंदोलनकारियों का कहना है कि इस घटना का दर्द अभी कम भी नहीं हुआ था कि अगली सुबह धरना स्थल से टेंट ही गायब मिला। इससे आंदोलनकारियों में नाराजगी और बढ़ गई।
‘टेंट चोरी हुआ या प्रशासन ने हटाया?’ पुलिस के सामने पहुंचा मामला
टेंट गायब मिलने के बाद समिति के सदस्य चुप नहीं बैठे। वे नीमच कैंट थाने पहुंचे और टेंट गायब होने की शिकायत दी। आवेदन में टेंट हटाने वाले लोगों की पहचान कर पूरे मामले की जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
अब इस मामले में पुलिस शिकायत के बाद जांच का इंतजार है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर टेंट किसने हटाया, किसके निर्देश पर हटाया और उसे हटाने के पीछे क्या कारण था?
टेंट गया, हौसला नहीं
आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासन टेंट हटा सकता है, लेकिन मैदान बचाने की उनकी आवाज नहीं। 28 दिनों से चल रहा आंदोलन अब खुले आसमान के नीचे भी जारी रखने की बात समिति ने कही है।
समिति के सदस्यों का कहना है कि टेंट कपड़े का था, लेकिन मैदान बचाने का संकल्प उससे कहीं मजबूत है। अब देखना यह है कि इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन कब सामने आता है और टेंट हटाने की कार्रवाई को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करता है।