जावद। निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान मेडिकल सामग्री एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए मरीजों से ली जाने वाली राशि को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठी है। जावद विधानसभा क्षेत्र के पूर्व जिला उपाध्यक्ष कांग्रेस एडवोकेट प्रकाश रांका ने सरकार से इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने और शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। रांका ने कहा कि जावद क्षेत्र के कई मरीज बेहतर उपचार के लिए नीमच,उदयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों के निजी अस्पतालों में जाते हैं। उपचार के दौरान अस्पताल शुल्क के अलावा मेडिकल सामग्री एवं उपकरणों के नाम पर होने वाले खर्च की जानकारी मरीज और उनके परिजनों को स्पष्ट रूप से मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ₹11 की वस्तु ₹325 में बेचे जाने जैसी शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन ऐसी किसी भी शिकायत की वास्तविक स्थिति संबंधित बिल, खरीद दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। इसलिए उन्होंने सक्षम अधिकारियों से शिकायतों की तथ्यात्मक जांच कराने की मांग की है। रांका के अनुसार, अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली चिकित्सा सामग्री के संबंध में मरीजों को बिल, सामग्री का विवरण और उनसे वसूली गई राशि की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी संस्था द्वारा निर्धारित नियमों का उल्लंघन या अनुचित वसूली पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि, अस्पतालों में उपयोग होने वाली चिकित्सा सामग्री की कीमतों में अंतर के पीछे खरीद लागत, ब्रांड, गुणवत्ता, स्टोरेज, आपूर्ति व्यवस्था और अस्पताल से जुड़ी अन्य सेवाओं जैसे विभिन्न कारक भी हो सकते हैं। इसलिए केवल खरीद मूल्य और मरीज से वसूली गई राशि की तुलना के आधार पर अनियमितता का निष्कर्ष निकालने के बजाय प्रत्येक मामले की दस्तावेजों के आधार पर जांच जरूरी है।
रांका ने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए गंभीर बीमारी का इलाज पहले ही आर्थिक चुनौती होता है। ऐसे में चिकित्सा खर्चों में पारदर्शिता और मरीजों को बिल एवं शुल्क का स्पष्ट विवरण उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मेडिकल सामग्री की कीमतों और मरीजों से होने वाली वसूली को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए तथा प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाए।