नीमच। मंदसौर से दिल्ली जा रही अशोका ट्रेवल्स की बस में यात्रियों की सुरक्षा को ताक पर रखकर यात्रा कराने का एक बेहद गंभीर और गैर-जिम्मेदाराना मामला सामने आया है। बीती शाम करीब 7:00 बजे जब अशोका ट्रेवल्स की यह बस मंदसौर से नीमच पहुंची, तो बस की खतरनाक हालत देखकर यात्रियों के होश उड़ गए। बस का सामने का मुख्य कांच पूरी तरह फूटा हुआ था, दरवाजा रस्सी के सहारे बांध रखा था, और साथ ही बस का एसी तथा अल्टरनेटर भी खराब पड़ा था। इस जानलेवा स्थिति को देखकर यात्रियों ने आगे सफर करने से इनकार कर दिया और मीडियाकर्मियों से संपर्क कर मदद की गुहार लगाई।
सूचना मिलते ही जब पत्रकार मौके पर पहुंचे और अशोका ट्रेवल्स के मैनेजर मेहुल जैन से इस लापरवाही को लेकर सवाल-जवाब किए, तो मैनेजर सहयोग करने के बजाय पत्रकारों और आम यात्रियों से खुलेआम बदतमीजी करने लगा। यात्रियों ने जब टिकट का पैसा वापस मांगा, तो मैनेजर ने दो टूक शब्दों में रिफंड देने से मना कर दिया। यात्रियों के आक्रोश और पत्रकारों की मौजूदगी के चलते दबाव बढ़ने पर मौके पर पुलिस को बुलाया गया। पुलिस और मीडिया के कड़े रुख के बाद ट्रेवल्स प्रबंधन ने बस का एसी और अल्टरनेटर तो सुधरवा दिया, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा सबसे बड़ा खतरा जस का तस छोड़ दिया गया।
हैरानी की बात यह रही कि आगे का फूटा हुआ कांच बदले बिना ही बस को उसी खतरनाक स्थिति में दिल्ली के लिए रवाना करने का फैसला ले लिया गया। रात करीब 11:30 बजे तक बस स्टैंड पर भारी हंगामा चलता रहा, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के दौरान परिवहन विभाग या स्थानीय प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर स्थिति का जायजा लेने नहीं पहुंचा। विवाद बढ़ता देख मैनेजर ने रिफंड की बात तो कही, लेकिन उसमें भी नया पेंच फंसाते हुए कहा कि रिफंड केवल उसी बुकिंग काउंटर से मिलेगा जहां से टिकट खरीदा गया था। अधिकांश यात्री मंदसौर से टिकट बुक करा चुके थे, ऐसे में रात के समय नीमच में खड़े इन बेबस यात्रियों के लिए पैसा वापस लेना नामुमकिन सा हो गया।
यात्रियों का आरोप है कि अशोका ट्रेवल्स की इस तरह की मनमानी और दादागिरी कोई नई बात नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कई बार ऐसी लापरवाहियां सामने आ चुकी हैं। अब सबसे बड़ा सवाल स्थानीय प्रशासन और यातायात विभाग की कार्यप्रणाली पर उठता है कि बिना सामने के कांच के एक बस को सैकड़ों किलोमीटर लंबे हाईवे पर 40 से अधिक यात्रियों को लेकर जाने की अनुमति कैसे दे दी गई। अगर रात के अंधेरे में तेज रफ्तार के दौरान कोई पक्षी, उड़ने वाला कीट या उड़ती हुई धूल मिट्टी ड्राइवर को लग जाती और कोई गंभीर दुर्घटना घट जाती, तो उन 40 मासूम जिंदगियों का जिम्मेदार कौन होता। लाचार और परेशान यात्री अपनी जान हथेली पर रखकर उसी असुरक्षित बस में सवार होकर दिल्ली रवाना होने को मजबूर हुए।
मौके पर पहुंचे पत्रकारों को साधुवाद है उन्होंने यात्रियों की समस्या को जाना और यात्रियों का सहयोग किया अशोक ट्रेवल्स बस प्रबंधन ने अपनी मनमानी पुरी की लेकिन पत्रकारों के दबाव में बस में दो ड्राइवर भेजे गए ।