( मनोज मीणा )
 
नीमच। नीमच मेडिकल कॉलेज निजी हाथों में देने की तैयारी सामने आते ही विरोध शुरू हो गया। शहर में सोशल मीडिया से लेकर राजनीति ओर चिकित्सा क्षेत्र तक इसका विरोध हुआ। विधायक दिलीप सिंह परिहार ने मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के सामने मांग रखी,वही डॉक्टर शिक्षक,ओर विद्यार्थी भी मैदान में उतर आए। विरोध के बीच 24 सितंबर को शासन ने अपना फैसला बदलते हुए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को निजी हाथों में नहीं देने की स्थिति साफ कर दी। 
 
17 सितंबर को सामने आया था प्रस्ताव
उल्लेखनीय है कि 17 सितंबर को प्रदेश के 9 सरकारी मेडिकल कॉलेजों को निजी भागीदारी से संचालित करने का प्रस्ताव सामने आया था। इसमें नीमच, श्योपुर  सिंगरौली मंडला,राजगढ़, बुधनी, छतरपुर,ओर दमोह सहित 9 कॉलेज शामिल थे। प्रस्ताव के तहत कॉलेजों के संचालन के लिए निजी भागीदारों के चयन और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी थी। इस संबंध में निवेश और संचालन की संभावनाओं की जानकारी भी सामने आई थी।  इन कॉलेजों के तैयार करने में करीब 4 हजार करोड़ रुपए के निवेश की जानकारी सामने आई थी। नीमच, श्योपुर और सिंगरौली मेडिकल कॉलेजों में करीब दो वर्ष से 100-100 एमबीबीएस सीटों पर पढ़ाई चल रही है। ऐसे में पहले से संचालित सरकारी मेडिकल कॉलेजों को निजी हाथों में देने की तैयारी ने कई सवाल खड़े कर दिए। सरकारी संसाधनों से तैयार संस्थानों के संचालन में निजी भागीदारी की योजना सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया।
 
मुख्यमंत्री के सामने विधायक ने उठाया मुद्दा-प्रस्ताव सामने आने के बाद नीमच में विरोध तेज हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नीमच दौरे के दौरान विधायक दिलीपसिंह परिहार ने मेडिकल कॉलेज को निजी हाथों में नहीं देने की मांग उनके सामने रखी। विधायक ने सरकारी मेडिकल कॉलेज के संचालन को लेकर अपनी बात रखी। इधर, सोशल मीडिया पर भी लोगों ने सरकारी मेडिकल कॉलेज को निजी व्यवस्था में देने की तैयारी पर सवाल उठाए। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया। मेडिकल कॉलेज के शिक्षक, चिकित्सक और विद्यार्थी सरकारी संस्थान को सरकारी व्यवस्था में ही संचालित रखने की मांग को लेकर सामने आए। शासन ने स्पष्ट किया- सरकारी व्यवस्था में ही होगा संचालन-लगातार उठ रहे विरोध के बीच 24 सितंबर को राज्य शासन की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई। शासन ने कहा कि राज्य शासन द्वारा निर्मित एवं निर्माणाधीन चिकित्सा महाविद्यालयों का संचालन और संधारण राज्य शासन ही करेगा। इन्हें निजी भागीदारी के आधार पर संचालन के लिए नहीं दिया जाएगा। इस स्पष्टीकरण के बाद सरकारी मेडिकल कॉलेजों को निजी हाथों में सौंपने की आशंका पर विराम लगा है। 17 सितंबर को सामने आए प्रस्ताव के करीब एक सप्ताह बाद शासन की ओर से स्थिति साफ किए जाने को नीमच में उठे विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है। नीमच मेडिकल कॉलेज को निजी हाथों में देने की तैयारी के खिलाफ जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने अपनी आवाज उठाई। अब शासन के स्पष्टीकरण के बाद कॉलेज का संचालन सरकारी व्यवस्था में ही जारी रहने की बात स्पष्ट हो गई है।