नीमच। डॉक्टर को लोग भगवान का रूप कहते हैं,लेकिन जब किसी चिकित्सक के साथ वर्षों तक काम करने वाला व्यक्ति उसकी कार्यशैली, व्यवहार और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता की गवाही दे, तो उस प्रशंसा की अपनी अलग अहमियत होती है। नीमच के उषा चिकित्सालय के डॉ.आशीष जोशी एवं डॉ.अंजू जोशी के प्रति उनके पूर्व सहयोगी के.एल.नागदा ने अपने 18 वर्षों के अनुभव को भावपूर्ण शब्दों में साझा किया है। के.एल. नागदा बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 2000 से 2018 तक लगातार 18 वर्ष डॉ. आशीष जोशी एवं डॉ. अंजू जोशी के साथ काम किया। इतने लंबे समय तक दोनों चिकित्सकों के साथ काम करने के बाद उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा मरीजों के प्रति सेवा और संवेदनशीलता का भाव देखा।
नागदा के अनुसार, उनके अनुभव में दोनों चिकित्सकों का व्यवहार मरीजों और जरूरतमंद लोगों के प्रति बेहद सहज और आत्मीय रहा। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के प्रति भी चिकित्सकों का रवैया मददगार रहा और कई बार आर्थिक स्थिति से अधिक मरीज के इलाज को प्राथमिकता दी गई।
मरीजों से संवाद में भी दिखती है संवेदनशीलता
के.एल. नागदा कहते हैं कि चिकित्सा के साथ मरीज से संवाद भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। डॉ. आशीष जोशी और डॉ. अंजू जोशी का मरीजों से मुस्कुराकर और सहजता से बात करने का अंदाज उन्हें हमेशा प्रभावित करता रहा। उनके मुताबिक, दर्द और चिंता से परेशान मरीजों को चिकित्सकों का व्यवहार मानसिक रूप से भी संबल देता था।
18 वर्षों के अपने अनुभव को याद करते हुए नागदा कहते हैं कि उन्होंने दोनों चिकित्सकों को स्टाफ, मरीजों और जरूरतमंदों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करते देखा। उनके अनुसार, दोनों की कार्यशैली में संयम, विनम्रता और सेवा की भावना प्रमुख रही।
पति-पत्नी दोनों की सोच में सेवा का भाव
नागदा के शब्दों में, डॉ. आशीष जोशी और डॉ. अंजू जोशी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि दोनों चिकित्सकों की सोच में मरीज की सेवा और उसके प्रति जिम्मेदारी का भाव दिखाई देता है। उनका कहना है कि इतने वर्षों तक साथ काम करने के बाद भी दोनों के प्रति उनके मन में सम्मान कम नहीं हुआ, बल्कि समय के साथ और बढ़ा है।
वे कहते हैं कि उषा चिकित्सालय में बिताए 18 वर्षों की यादों को शब्दों में समेटना आसान नहीं है। जितना लिखा जाए, उतना कम लगता है। उनके अनुसार, किसी चिकित्सक की पहचान केवल उसके इलाज से नहीं, बल्कि मरीज और उसके परिवार के साथ उसके व्यवहार से भी होती है और इसी कसौटी पर उन्होंने दोनों डॉक्टरों को हमेशा सम्मान के योग्य पाया।
“नीमच को मिले ऐसे चिकित्सकों पर गर्व”
अपने संदेश के अंत में के.एल. नागदा ने डॉ. आशीष जोशी एवं डॉ. अंजू जोशी के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए कहा कि वे इसी तरह जरूरतमंदों और मरीजों की सेवा करते रहें।
उन्होंने दोनों चिकित्सकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि 18 वर्षों तक साथ काम करने के अनुभव के आधार पर उनके लिए सम्मान और आभार व्यक्त करने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं।
— के.एल. नागदा
पूर्व सहयोगी, उषा चिकित्सालय (2000–2018)
रेवली-देवली, नीमच