नीमच, 4 अक्टूबर। अफीम उत्पादक किसानों की निगाहें अब केंद्र सरकार की बहुप्रतीक्षित अफीम नीति 2026-27 पर टिकी हैं। नीति जारी होने में हो रही देरी के बीच किसानों के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं। केंद्र सरकार के स्तर पर चल रही प्रक्रिया और विभागीय गतिविधियों को देखते हुए नीति के इसी पखवाड़े जारी होने की संभावना जताई जा रही है। मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश के करीब 1.60 लाख अफीम उत्पादक किसानों को इस बार की नीति से कई अहम राहतों की उम्मीद है।
12 साल में पहली बार सितंबर-अक्टूबर के बीच असमंजस- पिछले 12 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अफीम नीति जारी होने का समय लगभग सितंबर-अक्टूबर के बीच रहा है। वर्ष 2014 से 2025 तक पांच बार सितंबर और सात बार अक्टूबर में नीति जारी हुई। वर्ष 2014, 2018, 2022, 2023 और 2025 में सितंबर में नीति घोषित हुई थी, जबकि अन्य वर्षों में अक्टूबर में इसका ऐलान किया गया।
पिछले वर्ष 11 सितंबर को नीति जारी कर दी गई थी। इस बार हुई देरी को लेकर किसानों में उत्सुकता के साथ चिंता भी है। हालांकि विभागीय स्तर पर इसे नीतिगत प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है। किसानों को उम्मीद है कि देरी का परिणाम इस बार कुछ बड़े बदलावों के रूप में सामने आ सकता है।
गांवों की चौपाल तक पहुंचे नारकोटिक्स अधिकारी इस बार नीति को लेकर किसानों की उम्मीद इसलिए भी बढ़ी है, क्योंकि नारकोटिक्स विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने सीधे अफीम उत्पादक गांवों में पहुंचकर किसानों से संवाद किया। नारकोटिक्स कमिश्नर,डिप्टी नारकोटिक्स कमिश्नर और असिस्टेंट नारकोटिक्स कमिश्नर सहित अधिकारियों ने करीब 50 गांवों में सेमिनार और संवाद कार्यक्रम किए। इन बैठकों में किसानों ने पट्टों की बहाली, मार्फिन मापदंड, न्यूनतम मूल्य, खेती की पद्धति और लाइसेंस से जुड़ी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। किसानों का कहना है कि अधिकारियों ने समस्याओं को गंभीरता से सुना और सकारात्मक समाधान का भरोसा दिलाया।
सीपी जोशी बोले- किसानों को अधिकतम राहत का प्रयास
चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ सांसद सीपी जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय के स्तर पर किसानों को अधिकतम राहत दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई नीति जल्द जारी होने की उम्मीद है और इसमें अफीम उत्पादक किसानों की अपेक्षाओं को पूरा करने की कोशिश होगी।
जोशी ने पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि 2014 से पहले बड़ी संख्या में अफीम पट्टे निरस्त हुए थे। भाजपा सरकार के प्रयासों से पट्टे निरस्त होने की दर में कमी आई है और पुराने पट्टों की बहाली की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी है।
सांसद सुधीर गुप्ता बोले- नीति से पहले घोषणा संभव नहीं
नीमच-मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि नई अफीम नीति जारी होने से पहले उसके प्रावधानों को लेकर कोई घोषणा नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि नीति को जल्द जारी करने के प्रयास चल रहे हैं और नीतिगत प्रक्रिया अपने स्तर पर आगे बढ़ रही है। पिछली बार 11 सितंबर तक नीति जारी हो गई थी, इस बार हुई देरी की कोई विशेष वजह नहीं है।
किसानों की प्रमुख मांगें
अफीम उत्पादक किसानों ने इस बार नीति में कई महत्वपूर्ण बदलावों की मांग रखी है। इनमें प्रमुख रूप से—
पुराने पट्टों की बहाली — 1990 से निरस्त पट्टों को बहाल करने की मांग।
न्यूनतम मूल्य में वृद्धि — अफीम का सरकारी न्यूनतम मूल्य बढ़ाकर 10 हजार रुपए प्रति किलो करने की मांग।
मार्फिन मानकों में राहत — मार्फिन की अनिवार्यता समाप्त करने तथा दो प्लॉट में खेती की अनुमति देने की मांग।
पारंपरिक पद्धति को बढ़ावा — सीपीएस के स्थान पर पारंपरिक चिराई-लुवाई पद्धति के लाइसेंस बढ़ाने की मांग।
प्रक्रिया में सरलीकरण — कच्चा तौल पूरी तरह बंद करने और लाइसेंस के नामांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग।
अब किसानों की नजर केंद्र सरकार की ओर है। माना जा रहा है कि नई नीति में यदि पट्टों की बहाली, उत्पादन मानकों और लाइसेंस संबंधी नियमों में राहत मिलती है तो यह लंबे समय से मांग कर रहे अफीम उत्पादकों के लिए बड़ा निर्णय साबित हो सकता है।